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    Post Views: 240 त्रिफला चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि:   हरड़ का छिलका, बहेड़े का छिलका, आँवला-गुठली रहित-प्रत्येक 1-1 भाग लेकर सूक्ष्म चूर्ण करके सुरक्षित रख लें।-शा. सं. मात्रा और अनुपान 3-9 माशे तक, रात को सोते समय गरम जल से या दूध के साथ अथवा विषम भाग घी और शहद के साथ दें। गुण…

  • Yavksharadi Churan

    Post Views: 329 यवक्षारादि चूर्ण गुण और उपयोग— कभी-कभी गर्मी ज्यादा बढ़ जाने से पेशाब में विकृति आ जाती है, जैसे-पेशाब खुल कर न होना, बँद-बँद होना, जलन और दर्द के साथ पेशाब लाल या अधिक पीला होना आदि। ऐसी हालत में यह चर्ण देने से बहुत लाभ करता हे । यवक्षार का प्रभाव मूत्रपिण्ड…

  • Dashang Lep

    Post Views: 327 दशांगलेप मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : सिरस की छाल, मुलेठी, तगर, लालचन्दन, इलायची, जटामांसी, हल्दी, दारुहल्दी, कठ, नेत्रवाला, खस-१-१ भाग लेकर कूट कपड़छन चूर्ण करें –भै.र. लेप विि–इस चूर्ण को जल के साथ पीसकर चूर्ण से पाँचवाँ भाग गोघ॒त मिलाकर लेप करें। शु गुण और उपयोग– रूग्ण स्थान पर इस लेप…

  • Lai Churan

    Post Views: 292 लाई चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— इस चूर्ण के सेवन से संग्रहणी, शूल, अफरा ओर अतिसार का नाश हाता तथा मर्न्दाग्न दूर हाती ह ओर पाचन शक्ति बढ़ता है। संग्रहणी की प्रारम्भिक अवस्था मे इसक उपयोग से बहुत लाभ होता है। यह पाचक पित्त को उत्तजित कर पाचन क्रिया…

  • Nimbadi Churan

    Post Views: 620 निम्बादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि :  नीम की छाल, गुर्च (गिलोय), हर्रे, ऑवला और सोमराजी-प्रत्येक ४-४ तोला, सोंठ, वायविडंग, पवाड (चक्रमर्द-चकवड़) पीपल, अजवायन, बच, जीरा, कुटकी, खैरसार, सेन्धा नमक, यवक्षार, हल्दी, दारुहल्दी, नागरमोथा, देवदारु और कठ-प्रत्येक १-१ तोला लेकर कूट-पीस कपड़छन चूर्ण बना सुरक्षित रख लें।—-भै. र. मात्रा और अनुपान–१…

  • Sarswat Churan

    Post Views: 304 सारस्वत चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— उन्माद, अपस्मार, मस्तिष्क की कमजोरी, स्मरणशक्ति की हीनता आदि में इसका उपयोग किया जाता है। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan) —: 2 से 4 माशे, सुबह-शाम घृत और शहद के साथ दें। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of…