Shrad Ritucharya

Shrad Ritucharya

शरद् में पित्त असंतुलन के लक्षण दाह – जलन, औष्ण्य – उष्ण – ताप, पाक – दमन, स्वेद – पसीना, क्लेद – मल-संचय, कोठा – सड़न, कंडू – खुजली, स्राव – ज्यादा तरलता, राग – आधिक लालिमा अंतर्निहित गंध, रंग और स्वाद। शरद् ऋतुचर्या वर्षाशीतोचिताङ्गानां सहसैवार्करश्मिभिः । तप्तानां सञ्चितं वृष्टौ पित्तं शरदि कुप्यति ।। ४९…

Varsha Ritucharya

Varsha Ritucharya

वर्षाऋतुचर्या ( Regimen of Rainy Season ) वर्षाऋतुचर्या का सैद्धान्तिक आधार सैद्धान्तिक आधार (Ayurveda principles in rainy season)- आदानकाल में मनुष्यों का शरीर अत्यन्त दुर्बल रहता है | दुर्बल शरीर में एक तो जठराग्नि दुर्बल रहती ही है, वर्षाऋतु आ जाने पर दूषित वातादि दोषों से दुष्ट जठराग्नि और भी दुर्बल हो जाती है। इस…

Causes of Skin disease according to Ayurveda

Causes of Skin disease according to Ayurveda

कुष्ठ का निदान: विरोधी अन्न-पान का सेवन द्रव, स्निग्ध तथा गुरु, आहार द्रव्यों का अधिक सेवन आये हुए वमन के वेगों को, तथा अन्य मल-मूत्रादि के वेग को रोकना अधिक आहार करने के बाद व्यायाम अथवा अधिक धूप या अग्नि का सेवन अधिक शीत, उष्ण सेवन अधिक लंघन (उपवास) भोजन इनके क्रम को त्यागकर सेवन…

Koshtha in Ayurveda

Koshtha in Ayurveda

कोष्ठ: कोष्ठः क्रूरो मृदुमध्यो मध्यः स्यात्तैः समैरपि । कोष्ठ — वायु के कारण मनुष्य का कोष्ठ क्रूर होता है; पित्त के कारण मृदु और कफ के कारण मध्यम होता है। वात- पित्त-कफ की समानता से भी मध्यम कोष्ठ होता है । वक्तव्य—सुश्रुत में मृदु, मध्यम और क्रूर तीन कोष्ठ बताये हैं, यथा- ‘तत्र मृदुः क्रूरो,…

Effect of Vaat ,Pitt and Kaph on digetion

Effect of Vaat ,Pitt and Kaph on digetion

दोषों का अग्नि से सम्बन्ध तैर्भवेद्विषमस्तीक्ष्णो मन्दश्चाग्निः समैः समः ।।८।। (अ.ह.सू.अ-1) वात के कारण अग्नि विषम, पित्त के कारण तीक्ष्ण और कफ के कारण मन्द होती है। वात-पित्त-कफ के समान होने से अग्नि भी समान होती है ॥८॥ वक्तव्य — विषम अग्नि – वायु के अपने स्वभाव एवं क्रिया के चंचल, अस्थिर और विषम होने…

Vaat, Pitt and Kaph in Ayurveda

Vaat, Pitt and Kaph in Ayurveda

त्रिदोष- वात, पित्त और कफ वायुः पित्तं कफश्चेति त्रयो दोषाः समासतः ।। ६ ।। (अ.ह.सू. अ.1) संक्षेप में तीन दोष हैं-वायु, पित्त और कफ ॥६॥ वक्तव्य — दोष का अर्थ दूषित करने वाली वस्तु है। ये वायु-पित्त-कफ शरीर को दूषित करते हैं इसीलिये चरक में कहा है-‘वायुः पित्तं कफश्चोक्तः शारीरो दोषसंग्रहः’ ये ही दोष-हेतु-या कारण…

Ashta Ahara vidhivisheshayatana (8 specific factors of the method of dieting)

Ashta Ahara vidhivisheshayatana (8 specific factors of the method of dieting) Health is that the state of physical, mental, social, and spiritual well-being. It’s dependent upon food and their proper food preparation method. The Prayojana of Ayurveda is to guard the health of the healthy and to cure disorders within the diseased condition. As Acharyas…

पथ्यापथ्य(हितकर एवं अहितकर)

पथ्यापथ्य(हितकर एवं अहितकर) पथ्ये सति गदार्तस्य किमौषधनिषेदणैः॥ पथ्येऽसति गदार्तस्य किमौषधनिषेवणैः॥ इसका भाव. यह है कि यदि रोगी पथ्य से रहे, तो उसे औषध सेवन कराने की क्या जरूरत? अर्थात्‌ रोगोत्तर पथ्यापथ्य के विचार से रहने पर ही बहुत से प्रारम्भिक रोग अच्छे हो जाते हें। जैसे साधारण ज्वरादि। इसी तरह यदि रोगी अपथ्य से रहे,…