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    Post Views: 294 अमृतप्राशावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह उत्तम पौष्टिक है। खाँसी, क्षय, दमा, दाह, तृषा, रक्तपित्त और शुक्रक्षय में इसका प्रयोग करें। कृश और जिनके शरीर का वर्ण और स्वर क्षीण हो गया हो उनको, तथा विशेष स्री-प्रसङ्ग करने वालों और रोगों से कृश हुए व्यक्तियों को यह पुष्ट करता…

  • Pashupat Ras

    Post Views: 20 पाशुपत रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, तीक्ष्ण लोहभस्म 3 तोला और शुद्ध बच्छनाग 6 तोला लें। प्रथम पारा-गंधक की कज्जली बना, फिर अन्य औषधें मिला, सबको एक दिन चित्रकमूल के क्वाथ में घोंटें। फ़िर सोंठ, पीपल, मिर्च…

  • Agnivardhak Gutika

    Post Views: 283 अग्निवर्द्धक बटी गुण और उपयोग (Uses and Benefits )– यह अत्यन्त स्वादिष्ट और पाचक रस उत्पन करने वाली है । इससे भोजन पच कर भूख खूब लगती और दस्त साफ आता हे। एक-दो गोली खाते ही मुह का बिगड़ा हुआ स्वाद ठीक हो जाता है। यह गोली मन्दाग्नि, अरुचि, भूख न लगना,…

  • Panchamrit Lohmandur

    Post Views: 236 पंचामृत लौहमण्डूर गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से शोथयुक्‍त जीर्ण, संग्रहणी रोग, पाण्डु, कामला, अग्निमान्द्य, जीर्णज्चर, प्लीहावृद्धि, गुल्म, उदररोग, यकृत्‌ वृद्धि, कास, श्वास, प्रतिश्याय आदि रोग नष्ट होते हैं। यह औषधि उत्तम शक्तिवर्धक है। इसका उपयोग, विशेषतः रोग की जीर्णावस्था में होता है। रोग जितना ही जीर्ण हो,…

  • Baboolarist

    Post Views: 137 बब्बूलारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से क्षय, सोमरोग, उरःक्षय, दमा, खाँसी, रक्तपित्त, मूत्रविकार, रक्तविकार अतिसार, कुष्ठ, प्रमेह आदि रोग नष्ट होते हैं। यह अरिष्ट कफ को दूर करता है और श्वासनली को साफ करता तथा खाँसी के साथ आने वाले खून को रोकता है। अग्नि को दीप्त कर…

  • Vatari Ras

    Post Views: 18 वातारि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, त्रिफला चूर्ण मिश्रित 3 तोला, चित्रक मूल की छाले 4 तोला, शुद्ध गूगल 5 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कञ्जली बनावें। पश्चात्‌ शुद्ध गूगल को एरण्ड तैल में डालकर पतला करें…