रसोन रसोनोऽम्लरसोनः स्यात गरूष्णः कफवातनुत्। अरूचिक्रिमिहृद्रोग-शोफघ्नश्च रसायनः ॥ ५० ॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- रसोन…
पलाण्डु पलाण्डुः कटको बल्यः कफपित्तहरो गरु: । वृष्यश्च रोचनः स्निग्धो वान्तिदोषविनाशनः ॥ ५७॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- पलाण्डु कटुरसवाला, बलवर्द्धक कफपित्तनाशक तथा गुरु है। यह वीर्यवर्द्धक रुचिकारक, स्निग्ध तथा वमन को नाश करता है। औषधीय गुण (Medicinal properties): रस–मधुर, कटु गुण–गुरु, तीक्ष्ण, स्निग्ध वीर्य–उष्ण विपाक–मधुर प्रयोज्य अंग–कन्द और बीज । मात्रा–कन्दस्वरस-१-३…
तगर तगरं शीतलं तिक्तं दृष्टिदोषविनाशनम् । विषार्तिशमनं पथ्य भूतोन्मादभयापहम्॥ १४३॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- तगर तिक्तरस युक्त तथा शीतल है, और नेत्रविकार को नाश करता है। यह विषजन्य उपद्रव को शांत करता है, पथ्य है तथा भूतोन्माद के भय को दूर करता है । औषधीय गुण (Medicinal properties): रस–तिक्त, कटु, मधुर,…
प्रसारणी के गुण प्रसारणी गुरूष्णा च तिक्ता वाततविनाशिनी । अर्शःश्वयथुहुन्त्री च मलविष्टम्भहारिणी ॥ ३८॥ गुण…
अङ्कोल अङ्कोल कटुकः स्निग्धो विषलूतादिदोषनुत्। कफानिलहर: सूत-शुद्धिकृत् रेचनीयकः | ७५॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- अङ्कोल कटु रस वाला तथा स्निग्ध है ओर लूता ( छिपकिली ) आदि के विष को दूर करता है। यह कफ तथा वात को दूर करने वाला; पारद को शुद्ध करने वाला तथा रेचक ( दस्तावर )…
एरण्ड तैल एरण्डततैलं कृमिदोषनाशनं वातामयघ्नं सकलाङ्गशलहृत् । कुष्ठापदं स्वादु रसायनोत्तमं पित्तप्रकोपं कुरुतेऽतिदीपनम्॥ ११४ ॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses)…
गुग्गुलु गुग्गुळुः कद्तिक्तोष्णः कफमारुतकासजित् । क्रिमिवातोदरप्लीह-शोफार्शोध्नो रसायनः ॥ १०५ ॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- गुग्गुलु कटु तथा तिक्त रस वाला एवं उष्ण वीर्य है। और कफजन्यरोग, वातजरोग तथा कास ( खांसी ) को दुर करता है। यह क्रिमिरोग, वातरोग, उदररोग, प्लीहारोग, शोथ तथा अर्श ( बवासीर ) को नष्ट करने वाला…
वेतस वेतसः कटुकः स्वादुः शीतो भूतविनाशनः। पित्तप्रकोपणो . रुच्यो विज्ञेयो दीपनः परः। रक्तपित्तोभ्दवं रोगं कुष्ठदोषं च नाशयेत् ॥ १०७॥ | गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- वेतस कटु तथा मधुर रस वाला; शीतल भूतदोष नाशक, पित्तप्रकोपक, रुचिकारक तथा उत्तम जाठराग्निदीपक है । यह रक्तपित्त से उत्पन्न रोग एवं कृष्टरोग को नाश करता है…
हिंगु हृद्यं हिङ्गु कटूष्णं च क्रिमिवातकफापहस् । बिबन्धाध्मातशूलघ्नं चक्षुव्य गुल्मनाशनस् ॥ ७४ ॥ गुण और कर्म (medicinal…
कटफल कटुरुष्णश्च कासश्वासञ्चरापह्ः । उम्रदाहृहरो रुच्यो मुखरोगशमप्रदः ॥ २१ ॥ RN गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- कायफल कटु रस वाला, उष्णवीर्य तथा खाँसी, श्वासवृद्धि एवं ज्वर को नाश करने वाला है और यह भयंकर दाह को दूर करने वाला, रुचिकर तथा मुखरोग को शान्त करने वाला है औषधीय गुण (Medicinal properties): रस–कटु, तिक्त,…