कुष्माण्ड मूत्राघातहरं प्रमेहशमनं कृच्छाश्मरीच्छेदनं विण्मूत्रग्लपनं तृषात्तिशमनं जीर्णाङ्गपुष्टिप्रदम् । वृष्यं स्वादुतरं त्वरोचकहरं बल्यं च पित्तापहं कुष्माण्डं प्रवरं वदन्ति भिषजो वल्लीफलानां पुनः ॥१६१॥ गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- कुष्माण्ड ( कुम्हड़ा ) मूत्रघात को दूर करने वाला, प्रमेह-शामक, मूत्रकृच्छु तथा पथरी छेदन करने वाला, मलमूत्र निकालने वाला, प्यास की पीड़ा को शान्त करने वाला,…
ज्योतिष्मती ज्योतिष्मती तिक्तरसा च रुक्षा किञ्चित्कटुर्वीतकफापहा च | दाहप्रदा दीपनकृच्च मेध्या प्रज्ञाञ्च पुष्णाति तथा द्वितीया ।।, ८५६ ॥ R.N गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- ज्योतिष्मती तिक्ष्ण रस से युक्त रूक्ष तथा थोड़ा कटु रस वाली होती है । यह बात-कफ को नाश करने वाली, दाहकारक, जाठराग्निदीपक एवं बुदधिवद्धंक है और इसी प्रकार…
शङ्खपुष्पी शङ्खपुष्पी हिमा तिक्ता मेधाकत् स्वरकारिणी । प्रहभूतादिदोषध्नी वशीकरणसिद्धिदा ॥ १३३ ॥ R.N गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- शङ्खपुष्पी, शीतवीर्यं तिक्तरसयुक्त मेधाकारक तथा स्वर ठीक करने वाली है यह ग्रह, भूत आदि दोषों को नाश करने वाली है तथा वशीकरण सिद्धि को देने वाली है। औषधीय गुण ( Medicinal properties) गुण- स्निग्ध,…
ब्राह्मी ब्राह्मी हिमा कषाया च तिक्ता वातास्रपित्तजित । बुद्ध प्रज्ञां च मेधां च कुर्य्यादायुष्यबद्धेनी ।। ६६ ॥ रा.नि. ब्राह्मी के गुण और कर्म (medicinal properties and uses) :- ब्राह्मी शीतवीर्य , कषाय रस, विपाक में तिक्त है। वातरक्त तथा पित्तविकार को शान्त करती है। यह बुद्धि, प्रज्ञाशक्ति एवं मेधाशक्ति को देती है तथा आयुवर्धक है…
क्षुधासागर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, सोंठ, मिर्च, पीपल, हरड़, बहेड़ा, आँवला, सेंधानमक, काला नमक, सामुद्र लवण, विड लवण, साम्भर लवण, यवक्षार, सज्जीखार, सुहागे की खील प्रत्येक 1- 1 भाग, शुद्ध बच्छनाग 2 भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना, शेष औषधियों का कपड़छन…
क्षुदूबोधक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – सोंठ, पीपल, मिर्च -7 तोला, सेन्धा नमक 2 तोला, शुद्ध गन्धक 3 तोला लेकर सबको एकत्र मिला, नींबू के रस में खरल कर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना, छाया में सुखा कर रख लें। —र. रा. सु. मात्रा और अनुपान (Dose and…
क्षयान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – लौह भस्म और रससिन्दूर 1-1 तोला, मोती भस्म और स्वर्ण भस्म–प्रत्येक 3-3 माशा, गुर्च का सत्व 1 तोला, त्रिफला 1 तोला, केशर 3 माशा और कस्तूरी । माशा लेकर सबको एकत्र मिला कर 3 दिन वासा (अडूसा) के रस में खरल कर…
हेमनाथ रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, स्वर्ण भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म 1 – 1 तोला तथा लौह भस्म कपूर, प्रवाल भस्म और बंग भस्म 6-6 माशे लेकर सबको एकत्र मिला खरल करें, कज्जली हो जाने पर उसे अफीम के पानी, केले के फूलों के रस…
हेमगर्भ रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – ५ तोला शुद्ध पारद में सोने का वर्क 4 तोला लेकर एक-एक करके मर्दन करें। जब सब वर्क मिल जाये, तब उसमें 72 तोला शुद्ध गन्धक मिला कर कज्जली करें। पीछे उसमें 76 तोला अच्छे बसराई मोती का कपड़छन चूर्ण, 24 तोला…
हेमगर्भ पोट्टली रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – शुद्ध पारा 4 तोला और स्वर्ण भस्म या वर्क 1 तोला लें। यदि भस्म न लेकर वर्क लिये हों, तो पारा वर्क को एकत्र मिलाकर खरल करें। जब स्वर्ण वर्क पारा में मिल जाय तो उसमें 10 तोला शुद्ध गन्धक डाल…