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    Post Views: 383 जातिफलादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: धोए हुएचन्दन, जायफल, लौंग, छोटी इलायची, तेजपात, दालचीनी, नागकेशर, कपूर, सफेद काले तिल, बंशलोचन, तगर, आँवला, तालीसपत्र, पीपल, हर्रे, चित्रकछाल, सोंठ, वायविडंग, मिर्च और कालौंजी – प्रत्येक समभाग लेकर कपड़छन चूर्ण तैयार करें, जितना चूर्ण हो उसके बराबर धुली हुई भांग का चूर्ण मिला दें।…

  • Bilvadi Churan

    Post Views: 188 बिल्वादि चूर्ण   गुण और उपयोग– यह चूर्ण उत्तम-पाचन और ग्राही है। अतिसार में इस चर्ण को अकेले ही या रस-पर्पटी के साथ मिलाकर देने से उत्तम लाभ होता है, प्रवाहिका (पेचिश-मरोड़ के साथ आँव और रकर्तामश्चित दस्त आना) में समभाग घी या एरण्ड तैल लगाकर सेंकी हुई छोटी हरड़ का चूर्ण…

  • Laghu Sudarshan Churan

    Post Views: 167 लघु सुदर्शन चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— यह भी सब प्रकार क ज्वरों को नष्ट करता है। तन्द्रा, भ्रम तृष, पाण्डु, कामला, कमर की पीड़ा, पीठ का दर्द, पसली का दर्द आदि रोगों को दर करता  है। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan) —1 to 5 gms , सुबह-शाम…

  • Punarnavadi Churan

    Post Views: 266 पुनर्नवा चूर्ण गुण और उपयोग– इसके सेवन से समस्त शरीर पर फैला हुआ शोथ-रोग दूर हो जाता है तथा उदर रोगों का नाश करता है। | इसमें पुनर्नवा की प्रधानता होने से यह चूर्ण दीपक, पाचक, दस्तावर, मृत्रविरेचक (मूत्र लाने वाला) तथा शोथ-नाशक है। इस चूर्ण का प्रधान गुण पेशाब खुल कर…

  • Avipatikar Churan

    Post Views: 159 अविपत्तिकर चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: सोंठ, पीपल, काली मिर्च, हरड़, बहेड़ा, आँवला, नागरमोथा, विड्नमक, वायविडंग, छोटी इलायची और तेजपात – प्रत्येक 1-1 तोला, लौंग 11 तोला, निशोथ की जड़ 44 तोला और मिश्री 66 तोला लेकर सब को कूट-कपड़छन चूर्ण बना कर सुरक्षित रख लें। नोट कई वैद्य विड्नमक के…

  • Madyantiadi Churan

    Post Views: 229 मदयन्त्यादि चूर्ण गुण और उपयोग— यह चूर्ण रक्‍तशोधक और साधारण रेचक है। पित्त प्रधान रोग में इस चूर्ण का उपयोग विशेषतया किया जाता है। खुजली, फोड़ा फुन्सी आदि रक्त-विकार होने पर इस चूर्ण के उपयोग से बहुत लाभ होता है। मात्रा और अनुपान–१ से २ माशा, दिन भर में २-३ बार जल…