Similar Posts

  • Parvahikahar Churan

    Post Views: 293 प्रवाहिकाहर चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : पोस्त के दाने, मोचरस, राल, बड़ीमाई तुरंजवीन, धाय के फूल–प्रत्येक १-१ तोला और रूमीमस्तंगी २ तोला लें। पहले मोचरस और पोस्त के.दाने तवे पर डाल कर भन लें बाद में सब चीजों को कट-कपड़छन चर्ण बना कर रख लें। मात्रा और अनुपान–६ माशे से…

  • Agnimukh Churan

    Post Views: 169 अग्निमुख चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: भुना हुआ सफेद जीरा 10 तोला, सोठ 5 तोला, सेंधानमक 15 तोला, काला नमक 5 तोला, काली मिर्च 5 तोला, नींबू सत्व 5 तोला, पिपरमेण्ट 111 माशा लें। पिपरमेण्ट और नींबू सत्व को छोड़ कर शेष द्रव्यों का सूक्ष्म चूर्ण करें। पश्चात् नींबू सत्व को…

  • Nagkesaradi Churan

    Post Views: 152 नागकेशरादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि :  नागकेशर ४ तोला, बेलगिरी २ तोला, अनीसून २ तोला, सौंफ २ तोला, खसखस १ तोला, छोटी इलायची १ तोला, धनियाँ १ तोला, मोचरस १ तोला, खस १ तोला, सफेद चन्दन १ तोला, गुलाब के फूल १ तोला, कपूर कचरी १ तोला, जल से धोकर…

  • Chitrakadi Churan

    Post Views: 284 चित्रकादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: चीता, पीपलामूल, पीपल, गजपीपल, हींग, पुष्करमूल, अनारदाना, कालाजीरा, वायविडंग, धनिया, हाऊबेर, सोया, हिंगुपत्री, चव्य, अम्लवेत, जीरा, अजवायन, कचूर, बच, तुम्बुरू, (नेपाली धनियाँ), अजमोद, अजवायन और काला नमक- प्रत्येक समान भाग तथा सब के बराबर सोंठ लेकर महीन चूर्ण करके बिजोरे नींबू के रस में घोंट…

  • Satavariadi Churan

    Post Views: 202 शतावर्यादि चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— यह चूर्ण पौष्टिक, श्रेष्ठ बाजीकरण और उत्तम वीर्यवर्द्धक है। इस चुर्ण के सेवन से रस-रक्तादि सप्त धातुओं की क्रमशः वृद्धि हो जाती है। इसके सेवन काल में ब्रह्मचय स रहने से शरीर में बल और पौरुष शक्ति की वर्धि होती है ओर निर्दोष…

  • Bhunimbadi Churan

    Post Views: 228 भूनिम्बादि चूर्ण गुण  और  उपयोग– इस चूर्ण के सवन से ज्वरातिसार, ग्रहणी, कामला. पांडु प्रमेह, अर्श आदि रोग नष्ट होते हैं। आंव को नष्ट करने एवं रकतातिसार को मिटाने क लिये यह अत्युत्तम गुणकारी योग है। मात्रा ओर अनुपान– २ स ३ माश तक सुबह -शाम, गुड़ के शरवत या छाळ क़ साथ…