Talkeshwar Ras
तालकेश्वर रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध हरताल, सोनामक्खी भस्म, शुद्ध मैनशिल, शुद्ध पारा, सेन्धा नमक और शुद्ध सुहागा 1-1 तोला तथा शुद्ध गंधक और शंख भस्म प्रत्येक 2-2 तोला लेकर, प्रथम पारा गन्धक की कज्जली बना, पश्चात् उसमें भस्मों तथा अन्य औषधियों का चूर्ण मिला कर जबीरी नींबू के रस में घोंटकर औषध के 30 वाँ भाग शुद्ध बच्छनाग मिला, महीन खरल करके शीशी में भर कर रख लें। भा. प्र.
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 2 से 3 रत्ती सुबह-शाम। बावची चूर्ण डेढ़ माशे और मधु तथा घृत न्यूनाधिक मात्रा में मिलाकर इसके साथ देना चाहिए। ऊपर से खदिरारिष्ठ या मंजिष्ठादि क्वाथ या अर्क पिलाना चाहिए।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- यह रस सब प्रकार के कुष्ठ रोग की महौषधि है।
- कुष्ठ जैसी भयंकर बीमारी में जल्दी कोई दवा असर नहीं करती। अतएव, इस रोग में दवा सेवनकाल में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। लगातार महीनों दवा सेवन करने से लाभ होता है।
- केवल औषध से ही इस रोग में लाभ नहीं होता, क्योंकि इस रोग का कारण अनेक दूषित विरुद्ध पदार्थो का सेवन करना है तथा पूर्व जन्म कृत महापापों का फल है। अतएव औषधि सेवन के साथ-साथ उचित आहार-विहार का पालन करते हुए देवोपासना (पूजा-पाठ आदि) तथा दान-पुण्य करना परमावश्यक है।
- उपरोक्त नियमों का पालन करते हुए अगर तालकेश्वर रस का सेवन किया जाय तो अवश्य ही कुष्ठ रोग से छुटकारा मिल सकता है।
- एक बार में अधिक काल तक दवा सेवन करने की अपेक्षा तीन सप्ताह दवा सेवन के पश्चात् एक महीने दवा बन्द कर पुनः 21 दिन दवा सेवन करके एक महीने के लिये दवा बन्द कर दें।
- इस प्रकार पाँच-सात बार प्रयोग करने से रोग निर्मूल हो जाता है।
- औषधि सेवन काल में तैल, मिर्च, मसाला, नमक, खटाई, दही, दूध, मछली, मांस, शराब आदि का परहेज करना चाहिये, गेहूँ या जौ के साथ चने मिलाकर, पिसाये आटे की रोटी, चीनी और घी के साथ खाना चाहिए।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
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