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    Post Views: 11 सर्वांगसुन्दर रस ( यक्ष्मा ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक 1-1 तोला, सुहागे की खील 2 तोला, मोतीपिष्टी, प्रवाल भस्म, शंख भस्म-प्रत्येक 1-1 तोला, सुवर्ण भस्म 6 माशे लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना, उसमें अन्य दवा मिला, नींबू के रस में…

  • Kalyan Avleh

    Post Views: 152 कल्याणावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस योग का पथ्यपूर्वक 21 दिन तक सेवन करने सें मनुष्य श्रुतिधर (सुनकर ही बातों का स्मरण रखने वाला) हो जाता है। बादल तथा दुन्दुभी के समान गर्जन करने वाला एवं मत्त कोकिल के समान स्वर वाला हो जाता है। इसके अतिरिक्त जड़ता, गद्गद…

  • Itchabhedi Ras

    Post Views: 32 इच्छाभेदी रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध सुहागा, काली मिर्च, सोंठ का चूर्ण–प्रत्येक एक-एक तोला और शुद्ध जयपाल (जमालगोटा) चूर्ण 3 तोला लें। पहले पारद-गन्धक की कज्जली बना उसमें अन्य दवाओं को मिलाकर घोंटें। फिर जल से 4 दिन खूब घोंटकर…

  • Vasa Avleh

    Post Views: 330 वासावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह सब तरह की खाँसी, श्वास, रक्तप्रदर, रक्तपित्त आदि रोगों को दूर करता है। पुरानी कफज खाँसी की यह अचूक दवा है। नवीन और प्राचीन कफ रोग अथवा खाँसी या शवासनलिका की सूजन में यह बहुत लाभ पहुँचाता है। पुराने कफज रोगों में हृदय के…

  • Sheetpitbhanjan Ras

    Post Views: 15 शीतपित्तभंजन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारद 3 भाग, शुद्ध गन्धक 3 भाग, कासीस भस्म 3 भाग, ताम्र भस्म 3 भाग लेकर सबको खरल में एकत्र डालकर भृंगराज-स्वरस और शरपुंखा-स्वरस या क्वाथ की 7-7 भावना देकर टिकिया बना, सुखा सराब-सम्पुट में रखकर पुट देवें।…

  • Kutaj Avleh

    Post Views: 294 कुटजावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से कच्चे-पक्के, रंग-बिरंगे और वेदनायुक्त सब प्रकार के अतिसार, दुःसाध्य संग्रहणी तथा प्रवाहिका (पेचिश) का नाश होता है। मरोड़ के दस्तों में जब कि भयंकर रीति से दस्त के साथ खून गिरता है, उस सयम इस अवलेह के सेवन से बहुत जल्द…