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  • Sarasvatarist

    Post Views: 193 सारस्वतारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से आयु, वीर्य, धृति, मेधा (बुद्धि), बल, स्मरणशक्ति और कान्ति की वृद्धि होती है। यह रसायन–हद्य अर्थात्‌ हृदय के रोगों को दूर करने वाला या हृदय को बल प्रदान करने वाला है। बालक, युवा (जवान), वृद्ध, स्री, पुरुषों के लिए हितकारी है। यह…

  • Jwarkesri Ras

    Post Views: 29 ज्वर केसरी रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारां, शुद्ध गन्धक, शुद्ध विष, सोंठ, पीपल, काली मिर्च, हरे, बहेड़ा, आँवला और शुद्ध जमालगोटा प्रत्येक दवा समान भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना फिर उसमें अन्य औषधियों का चूर्ण मिला, भाँगरे के रस में एक…

  • Mansyadi kwath

    Post Views: 37 मांस्यादि क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) इस क्वाथ का हिस्टीरिया, आक्षेप और बालकों का आक्षेप आदि रोगों में अकेले या अपतन्त्रकारि बटी या वृहद्वातचिन्तामणि या ब्राह्मी बटी (सुवर्ण-युक्त) या सर्पगन्धायोग–इनकेअनुपान रूप में प्रयोग करें। मस्तिष्क के क्षोभ एवं निद्रानाश में भी इसके सेवन से उत्तम लाभ होता है। मात्रा और…

  • Kameshwar Modak

    Post Views: 286 कामेश्वर मोदक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से वीर्य-वृद्धि तथा वीर्यस्तम्भन होता है। यह मोदक वाजीकरण और कामाग्निसंदीपन है। निर्बल पुरुषों को बल देता तथा .उरःक्षत, राजयक्ष्मा, कास, श्वास, अतिसार, अर्श, ग्रहणी, प्रमेह तथा श्लेष्मप्रकोप आदि अनेक व्याधियों को नष्ट करता है। यह बुद्धिवर्धक भी है। मात्रा और…

  • Eladiarist

    Post Views: 201 एलाद्घरिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस अरिष्ट का सेवन करने से विसर्प, मसूरिका (चेचक), रोमान्तिका, शीतपित्त, विस्फोट (फोड़े), विषमज्वर, नाड़ी व्रण (नासूर), दुष्टब्रण, दारुण कास, श्वास, भगन्दर, उपदंश और प्रमेह पीड़िका रोग आदि समूल नष्ट होते हैं। यह अरिष्ट शीत-वीर्य, मूत्रल, दीपन, पाचन, रक्त-प्रसादन, विषघ्न और बल्य है। इसके प्रभोग…