Sarpgandha Curan Yog
सर्पगन्धा चूर्ण योग
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – अत्यन्त सूक्ष्म पिसा हुआ रससिन्दूर 3 माशे, सर्पगन्धा का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण 5 तोला लेकर दोनों को एकत्र मिला एक-एक घण्टा तक अच्छी तरह खरल करके सुरक्षित रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan) :- 1-1 माशा, प्रातः-सायं जल से या दूध से या अर्क गुलाब से दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- आजकल हृदय-सम्बन्धी रोगों का प्रसार सभी वर्ग के लोगों में (विशेषतः जिनको बैठकर मस्तिष्क-सम्बन्धी कार्य अधिक करना पड़ता है) अत्यन्त तीव्रता से हो रहा है।
- इस रोग का प्रमुख कारण तीक्ष्ण औषधियों का अधिक सेवन करना, अत्यन्त पौष्टिक भोजन करना एवं शारीरिक परिश्रम न करना है। फलतः मेद वृद्धि होकर मधुमेह, हृदय रोग आदि व्याधियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।
- आयुर्वेद के मतानुसार हृदय रोग 5 प्रकार का होता है। किन्तु आधुनिक चिकित्सा-विज्ञान के अनुसार हाई ब्लडप्रेशर (रक्त चाप वृद्धि) और लो-ब्लडप्रेशर (रक्तचाप की क्षीणता) भी हृदय रोग होते हैं।
- इसमें हाई ब्लडप्रेशर में हृदय एवं नाड़ी की गति अत्यन्त तीव्र हो जाती है और कभी-कभी तो रक्तचाप की वृद्धि के कारण, मस्तिष्क में अधिक रक्त परिभ्रमण के कारण, मस्तिष्क की नस तक फट जाती है और परिणामतः रोगी की मृत्यु हो जाती है।
- इसी रक्तचाप की वृद्धि में अचानक हृदय की गति का रुक जाना भी सम्मिलित है।
- हाई ब्लडप्रेशर रोग के प्रारम्भ में बेचैनी, अनिद्रा, अत्यन्त घबराहट, चिड़चिड़ापन आदि लक्षण होते हैं।
- इनमें इस रसायन का सेवन करना अत्यन्त उपयोगी है। इसके प्रयोगः से रक्तचाप कम होकर गाढ़ी निद्रा आती है और शनै:-शनैः मोती पिष्टी या प्रवाल पिष्टी मिलाकर देने से हृदय बलवान होता है।
- इसके अतिरिक्त अपतन्त्रक (हिस्टीरिया), उन्माद और नवीन अपस्मार रोग में भी इससे अच्छा लाभ होता है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
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