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    Post Views: 259 एलादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: दालचीनी, तेजपात, तालीसपत्र, वंशलोचन,छोटी इलायची, नागकेशर, मुनक्काबीजरहित, अनारदाना, धनियाँ, काला जीरा, सफेद जीरा- प्रत्येक 2-2 तोला, पीपल, पीपलामूल, चव्य, चित्रकमूल, सोंठ, काली मिर्च, अजवायन, तिन्तिड़ीक, अम्लवेत, अजमोद, असगन्ध, कौंच के बीज छिलका रहित-प्रत्येक 1-1 तोला, मिश्री 16 तोला लेकर सब द्रव्यों को एकत्र मिला कूटकर…

  • Bakuchiadi Churan

    Post Views: 325 बाकचिकाद्य चूर्ण गुण और उपयोग — यह चूर्ण रक्तशो धक, विरेचक आर कृष्ठघ्न है। इसके सेवन से रफ्त-विकार, कष्ट, वातरक्त, शरीर पर होने वाली छोटी-छोटी फंसियाँ आदि विकार नप्ट हा जात है। मात्रा और अनुपान–२ से४ माशा तक गुर्च (गिलोय ) के क्वाथ या जल के साथ दें। मुख्य सामग्री तथा बनाने…

  • Manjisthadi Churan

    Post Views: 183 माञ्जिष्ठादि चूर्ण गुणऔर उपयोग– यह  चूर्ण दस्त और पेशाब साफ  लाने वाला और शोधक  है। मल-मूत्र की रुकावट, अर्श (बवासीर) और रक्त-विकार में इसके प्रयोग से विशेष लाभ होता हैं। पित्त प्रकति तथा रक्त और पित्त क विकारों म इसका प्रयाग बहुत लाभदायक हैं। मात्रा और अनुपान– ४ से ६ माशो, प्रातःकाल…

  • Kamalakshadi Churan

    Post Views: 690 कमलाक्षादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: कमलगट्टा 7 तोला, जायफल 2 तोला, केशर 1 तोला, तेजपात 1 तोला, शतावरी 2 तोला, असगन्ध 2 तोला, सफेद मूसली 2 तोला, बंशलोचन 1 तोला, सालम पंजा 2 तोला, छोटी इलायची के बीज 1 तोला, रूमीमस्तंगी 1 तोला, पीपलामूल 1 तोला, कबाब चीनी 1 तोला,…

  • Shantivardhak Churan

    Post Views: 297 शान्तिवर्धक चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— यह चूर्ण स्वादिष्ट, दीपक, पाचक एवं उत्कृष्ट रुचिवर्द्धक है। इस चूर्ण के सेवन से मन्दग्नि, भूख न लगना, जी मिचलाना, अपचन, अफरा, अम्लपित्त और समस्त प्रकार के उदरशूल आदि विकार नष्ट होते हैं। स्वादिष्ट होने के कारण इस चूर्ण को बच्चे बड़े प्रेम…

  • Agnimukh Churan

    Post Views: 169 अग्निमुख चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: भुना हुआ सफेद जीरा 10 तोला, सोठ 5 तोला, सेंधानमक 15 तोला, काला नमक 5 तोला, काली मिर्च 5 तोला, नींबू सत्व 5 तोला, पिपरमेण्ट 111 माशा लें। पिपरमेण्ट और नींबू सत्व को छोड़ कर शेष द्रव्यों का सूक्ष्म चूर्ण करें। पश्चात् नींबू सत्व को…