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  • GANGADHAR CHURAN

    Post Views: 187 गङ्गाधर चूर्ण (बृहत्) पाठा,बेलगिरी, सिंघाड़ा की पत्ती, दाड़िम की पत्ती, नागरमोथा, अतीस, राल, धाय के फूल, मिर्च, सौंठ, दारुहल्दी, चिरायता, नीम की छाल, जामुन की छाल, रसोत, इन्द्रजौ, मंजीठ, सुगन्ध वाला (खस), मोचरस, शुद्ध भांग, भाँगरा-प्रत्येक द्रव्य 1-1 तोला, की छाल 511 तोला लेकर सब द्रव्यों को एकत्र मिला, कूट कर, सूक्ष्म…

  • HardIye Churan

    Post Views: 352 हृद्य चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits ) – हृदय की दुर्बलता (धड़कन), नाड़ी वेगाधिक्य–इन लक्षणों में इस चूर्ण का प्रयोग करें। हृदय रोग मे उपद्रव रूप मे जब सर्वांग शोथ हो तब आरोग्य वद्धनी के साथ मिलाकर इसका उपयोग करने से विशेष लाभ होता हैं। पुरानी खाँसी मं जब कफ…

  • Lavan Bhaskar Churan

    Post Views: 276 लवण भास्कर चूर्ण गुण  और उपयोग– इसके सेवन से  मन्दाग्नि , अजीर्ण, वातकफज गुल्म, तिल्ली उदर रोग , क्षय, अर्श. ग्रहणी रोग, कुष्ठ, शूल, आम-विकार आदि रोग नष्ट होता हैं। यह चूर्ण खाने में बहुत स्वादिष्ट  और अत्यन्त लाभकारी भी हे। रोज़ाना के भोजन  के बाद याद इस चूर्ण का सेवन किया जाय…

  • Chopchiniadi Churan

    Post Views: 182 चोपचिन्यादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: चोपचीनी का चूर्ण 16 तोला, खाँड़ 4 तोला, पीपल, पीपलामूल, लौंग, काली मिर्च, अकरकरा, खुरासानी अजवायन, सोंठ, वायविडङ्ग और दालचीनी-प्रत्येक दवा 1-1 तोला लेकर कूट-छान चूर्ण बना लें। मात्रा और अनुपान: 3 से 6 माशा, सुबह-शाम। शहद और घी न्यूनाधिक मात्रा में मिला कर दें…

  • Karkati Beej Churan

    Post Views: 319 कर्कटी बीज चूर्ण: मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: ककड़ी के बीज, सेंधा नमक और त्रिफला सब चीजें समान भाग लेकर महीन चूर्ण बना, सुरक्षित रख लें। मात्रा और अनुपान: 3 माशा की मात्रा में सुबह-शाम गरम जल के साथ दें। गुण और उपयोग: – वृ. नि. र. यह चूर्ण पित्तशामक तथा मूत्र-प्रवर्तक…