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  • Panchgun Tel

    Post Views: 278 पंचगुण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): संधिवात में और शरीर के किसी भी अवयव में शूल (दर्द) में हल्के हाथ से मालिश करें। कर्णशूल में कान में डालें। सब प्रकार के वर्णों में ब्रण क़ो नीम और सम्भालू की बत्ती के क्वाथ से धोकर, उस पर इस तैल में भिंगोई…

  • Shothkalanal Ras

    Post Views: 4 शोथकालानल रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  चित्रक मूल की छाल, इन्द्रजौ, गजपीपल, सेंधानमक, पीपल, लौंग, जायफल , शुद्ध टंकण, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, शद्ध पारद, शुद्ध गन्धक-ये द्रव्य पृथक्‌-पृथक्‌ 1-1 भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें। पश्चात्‌ भस्में एवं अन्य चूर्ण करने योग्य द्रव्यों…

  • Narayan Tel

    Post Views: 220 नारायण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तैल के उपंयोग से सब प्रकार के वायु रोग जैसे पक्षाघात, अर्दित, हनुस्तम्भ, मन्यास्तम्भ, अपबाहुक, कमर का दर्द, पसली का दर्द, कान का दर्द, शरीर के किसी अवयव का सूखना, लँगड़ापन, सिर का दर्द तथा अन्य एकांग या सर्वाङ्ग में होने वाले…

  • Agasti Sootraj Ras

    Post Views: 47 अगस्ति सूतराज रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध हिंगुल 1-1 तोला, शुद्ध धतूरे के बीज 2 तोला तथा शुद्ध अफीम-2 तोला। प्रथम पारा गन्धक की कज्जली बना फिर अन्य दवाओं का महीन चूर्ण कर सबको मिलाकर भांगरे के रस में घोंटें।…

  • Ameer Ras

    Post Views: 31 अमीर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   सेंधानमक 5 छटाँक को खूब महीन पीसें। इसमें से 3 छटाँक नमक लेकर एक तवे पर 4 इंच गोलाकार में डालें। उस नमक पर सच्चे गोरे (चाँदी) का तार आधा तोला रखकर फिर रसकपूर तोला, रूमी सिंगरफ 4 तोला,…

  • Sarvajawarhar Loh

    Post Views: 252 सर्वज्वरहर लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह सब तरह के ज्वरों के लिए प्रसिद्ध है। इससे वातज, पित्तज, कफज, नये-पुराने ज्वर, सन्निपातज्वर, विषमज्वर, धातुगतज्चर तथा जाड़ा देकर आने वाले ज्वर आराम होते हैं। इसमें लौह का प्रधान मिश्रण होने के कारण यह मन्दाग्नि, अतिसार, प्लीहा, यकृत्‌, गुल्म, आमवात, अजीर्ण, ग्रहणी,…