Similar Posts

  • Laxmivilas Tel

    Post Views: 116 लक्ष्मीविलास तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल की मालिश करने से कठिन मस्तिष्क रोग शीघ्र नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त स्नायुगत रोग, स्नायविक दुर्बलता, प्रमेह, वात-व्याधि, मूर्च्छा, उन्माद, अपस्मार, ग्रहणी, पाण्डु रोग, शोष, नपुंसकता, वातरक्त, मूढ़ गर्भ, आर्तव और शुक्रगत दोषों को नष्ट करता है। यह तैल अत्यन्त पुष्टिकर…

  • Somraji Oil

    Post Views: 114 सोमराजी तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल की मालिश करने से समस्त प्रकार के कुष्ठ, नाड़ीव्रण, दुष्टब्रण आदि शीघ्र नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त पीलिका, पीड़िका, व्यंग, गम्भीर वातरक्त रोग, कण्डू, कच्छू, दाद, पामा आदि रोग नष्ट करता है। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of…

  • Mahasugandhit Tel

    Post Views: 131 महासुगन्धित तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): जिसके मस्तक में आधाशीशी का दर्द होता है, उसको सीधा लेटा कर गर्दन के नीचे तकिया लगाकर, मस्तक को तकिये के पीछे झुका दें, जिसंसे नाक के छेद आसमान की हरफ हो जायें, फिर 2-2 बूँद नासिका में यह तैल डालें और जोर से…

  • Apurvemalini Basant Ras

    Post Views: 62 अपूर्वमालिनी बसन्त मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   वैक्रान्त भस्म, अभ्रक भस्म, ताम्रभस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, रौप्य भस्म, बंग भस्म, प्रवाल भस्म, रससिन्दूर, लौह भस्म, शुद्ध टंकण, शंखभस्म–ये सब द्रव्य समान भाग लेकर खरल में एकत्र पीसकर खस के क्वाथ, शतावरी का रस या क्वाथ, हल्दी का रस…

  • Anu Tel

    Post Views: 120 अणु-तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इन्द्रियं कों अपने वश में रखें, तो यह तैल तीनों दोषों (बढ़े हुए) को नष्ट करता है। इन्द्रियों की बलवृद्धि करता है। इस तैल का समुचित काल में विधिपूर्वक प्रयोग करने से मनुष्य उत्तम गुणों को प्राप्त करता है। मनुष्य को अणु तैल का…

  • Irimedadi Tel

    Post Views: 373 इरिमेदादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तैल के गण्डूष करने (कुल्ले करने) से मसूढ़ों (दन्तवेष्ट) की सड़न, पीब गिरना, दाँतों का हिलना, शीर्णदन्त, दन्त सौषिर, श्यावदन्त, दन्त प्रहर्ष, दन्तविद्रधि, कृमिदन्त, (दाँतों . में कीड़ा लगना), दाँतों का कड़कना, मुखदुर्गन्धि, जीभ की पीड़ा, तालु की पीड़ा, ओष्ठ ग्रन्थि तथा अन्य…