Similar Posts

  • Abhyadi Modak

    Post Views: 183 अभयोदि मोदक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से बद्धकोष्ठता (कब्जियत), मन्दाग्नि, विषम-ज्वर, उदररोग, पाण्डु और वात रोग आदि रोग नष्ट होते हैं। इसमें दन्ती और निशोथ ये दोनों विरेचक औषधियाँ हैं। और इनमें भी निशोथ की मात्रा ज्यादा है। निशोथ विरेचन के लिए प्रसिद्ध दवा है। यही कारण है…

  • Madananand Modak

    Post Views: 368 मदनानन्द मोदक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इससे बल-वीर्य की वृद्धि, रति-शक्ति की वृद्धि और स्तम्भन शक्ति प्राप्त होती है। यह संग्रहणी और मन्दाग्नि की उत्तम दवा है। सत्री-सम्भोग के लिये सायंकाल इसका सेवन दूध के साथ करना चाहिए। आयुर्वेद के आचार्यो का मत है कि लगातार तीन सप्ताह तक…

  • Musali Pak

    Post Views: 237 मूसलीपाक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह पाक अत्यन्त पौष्टिक, बल-वीर्य तथा कामशक्ति-वर्द्धक और नपुंसकता-नाशक है। इसके सेवन से धातु-दौर्बल्य नष्ट होकर शरीर स्वस्थ, कान्तियुक्त एवं बलिष्ठ हो जाता है। स्त्रियों के प्रदर रोग तथा पुरुषों के वीर्य दोष को नष्ट करने में यह अत्युत्तम है। यह बात निश्चित है…

  • Vasa Haritiki Avleh

    Post Views: 302 वासाहरीतकी अवलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से खाँसी, क्षय, श्वास, रक्तपित्त और प्रतिश्याय (जुकाम) में फायदा होता है। नवीन और प्राचीन कफरोग अथवा खाँसी या श्वासनलिका की सूजन में इस अवलेह के सेवन से बहुत लाभ होता है। इससे कफ पतला होकर शीघ्र बाहर निकल जाता है, जिससे…

  • Ashavgandhadi Ghrit

    Post Views: 295 अशवगन्धादि घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस घृत के उपयोग से संमस्त प्रकार के वात रोग, सन्धि-शूल (जोड़ों का दर्द), कमर का दर्द, किसी भी अङ्ग में आई हुई अशक्तता, भ्रम (चक्कर आना), अनिद्रा आदि विकार नष्ट होते हैं। यह स्नायुमण्डल को अपूर्व शक्ति प्रदान करता है तथा रस-रक्तादि धातुओं…

  • Amritprash Avleh

    Post Views: 276 अमृतप्राशावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह उत्तम पौष्टिक है। खाँसी, क्षय, दमा, दाह, तृषा, रक्तपित्त और शुक्रक्षय में इसका प्रयोग करें। कृश और जिनके शरीर का वर्ण और स्वर क्षीण हो गया हो उनको, तथा विशेष स्री-प्रसङ्ग करने वालों और रोगों से कृश हुए व्यक्तियों को यह पुष्ट करता…