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    Post Views: 299 अम्लपित्तहर पाक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से अम्लपित्त, अरुचि, शूल, हृद्रोग, वमन, कण्ठदाह, हृदय की जलन, सिर-दर्द आदि रोग नष्ट होते हैं, तथा यह बलवर्द्धक और पौष्टिक भी है। अभ्रकभस्म और लौहभस्म का सम्मिश्रण होने से यह अम्लपित्त में विशेष गुण करता है। अभ्रकभस्म अम्लपित्त के लिए…

  • Gokharu Pak

    Post Views: 331 गोखरू पाक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसका उचित मात्रा में प्रातः सेवन करने से यह अर्श, प्रमेह और क्षय का नाश करता, शरीर को पुष्ट करता तथा काम-शक्ति बढ़ाता है। | इसका प्रभाव मूत्रपिण्ड और मूत्रेन्द्रिय की श्लेष्मल त्वचा पर विशेष होता है। यह मूत्रपिण्ड को उत्तेजित करता है।…

  • Narayan Jwarankush Ras

    Post Views: 23 नारायण ज्वरांकुश रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध संखिया, शुद्ध वत्सनाभ विष, शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक, शुद्ध हरिताल, सोंठ, काली मिर्च, पीपल, कपर्दक भस्म, शुद्ध भाँग, शुद्ध धतूरा-बीज, शुद्ध टंकण-ये प्रत्येक द्रव्य 1- 1 भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावे, पश्चात्‌ चूर्ण करने योग्य…

  • Gulkand

    Post Views: 186 गुलकन्द गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसका प्रयोग करने से दाह, पित्तदोष, जलन, आन्तरिक गरमी बढ़ना और कब्ज के विकार नष्ट होते हैं तथा मस्तिष्क को शान्ति पहुँचाता है। इसके सेवन से स्त्रियों के गर्भाशय की गरमी शमित होकर अत्यार्तव (मासिक धर्म में अधिक रक्त जाना) रोग नष्ट होता है।…

  • Balark Ras

    Post Views: 18 बालार्क रस ( केशर-गोरोचन-युक्त ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध खपरिया या शहद भस्म, प्रवाल भस्म या पिष्टीं, मृगशृङ्ग भस्म, शुद्ध हिंगुल, गोरोचन, कचूर और केशर प्रत्येक समभाग लेकर ब्राह्मी-स्वरस में 1 दिन मर्दन करके 1-1 रत्ती की गोलियाँ बना, छाया में सुखाकर शीशी में…

  • Kashisadi TEL

    Post Views: 147 कासीसादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : आचार्य श्री खरनाथ जी ने अर्शाकुरों का नाश करने के लिए इस तैंल को श्रेष्ठ कहा है। इस तैल को अर्शाकुरों पर लगाने से समस्त प्रकार के अर्शरोग नष्ट होते हैं। इस तैल के क्षारत्व गुण के कारण इसके लगाने से बवासीर शीघ्र नष्ट…