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    Post Views: 8 सिद्धप्राणेश्वर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, अभ्रक भस्म 4-4 तोला तथा सज्जीखार, सुहागे की खील, यवक्षार, पाँचों नमक (सेन्धा, काला, विड नमक, सांभर और सामुद्र नमक), हरे, बहेड़ा, आँवला, सोंठ, मिर्च, पीपल, इन्द्रजौ, सफेद जीरा, काला जीरा, चित्रकमूल, अजवायन, शुद्ध हींग,…

  • Balark Ras ( Plain)

    Post Views: 19 बालार्क रस ( साधारण ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  खर्पर भस्म (अभाव में यशद भस्म), प्रवाल भस्म, श्रृंङ्ग भस्म, शुद्ध हिंगुल, कचूर का चूर्ण–प्रत्येक 1-1 भाग लेकर सबको ब्राह्मी-स्वरस की भावना देकर अच्छी तरह मर्दन करें। गोली बनाने योग्य होने पर 1-1 रत्ती की गोलियाँ…

  • Lavangadi Churan

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  • Jeerakadiarist

    Post Views: 164 जीरकाद्यरिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह शीतल, रुचिकारक, चरपरा, मधुर, अग्नि को प्रदीप्त करने वाला, विष-दोष शामक तथा पेट के अफरे को दूर करने वाला है। यह थोड़ा उष्ण (गर्म) भी है और गर्भाशय की शुद्धि करता है। इसके अतिरिक्त सूतिका रोग, संग्रहणी, अतिसार और मन्दाग्नि के विकारों को दूर…

  • Lai Churan

    Post Views: 307 लाई चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— इस चूर्ण के सेवन से संग्रहणी, शूल, अफरा ओर अतिसार का नाश हाता तथा मर्न्दाग्न दूर हाती ह ओर पाचन शक्ति बढ़ता है। संग्रहणी की प्रारम्भिक अवस्था मे इसक उपयोग से बहुत लाभ होता है। यह पाचक पित्त को उत्तजित कर पाचन क्रिया…

  • Sarswat Churan

    Post Views: 306 सारस्वत चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— उन्माद, अपस्मार, मस्तिष्क की कमजोरी, स्मरणशक्ति की हीनता आदि में इसका उपयोग किया जाता है। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan) —: 2 से 4 माशे, सुबह-शाम घृत और शहद के साथ दें। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of…