Gulkand
गुलकन्द
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- इसका प्रयोग करने से दाह, पित्तदोष, जलन, आन्तरिक गरमी बढ़ना और कब्ज के विकार नष्ट होते हैं तथा मस्तिष्क को शान्ति पहुँचाता है।
- इसके सेवन से स्त्रियों के गर्भाशय की गरमी शमित होकर अत्यार्तव (मासिक धर्म में अधिक रक्त जाना) रोग नष्ट होता है।
- हाथ पैर और तलवों में जलन रहना, आँखों में जलन होना तथा गरमी के कारण आँखें लाल रहना, पसीना अधिक आना, गरमी के कारण त्वचा का रङ्ग काला पड़ जाना, शरीर में अन्हौरिया (छोटी-छोटी दानेदार पिटिकायें) होना आदि विकारों में भी इसके सेवन से उत्तम लाभ होता है।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan) :- 1-2 तोला, आवश्यकतानुसार जल से या दूध से दें।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – मौसमी गुलाब के ताजे फूलों की डण्डियां निकाल कर फूलों की पंखुड़ियों को पृथक्पृथक् करके, फूलों के वजन से दुगुनी चीनी मिला दें। पश्चात् कलईदार बरतन या एनामेल के तसले (पात्र) में थोड़ी-थोड़ी उन पंखुड़ियों और थोड़ी चीनी को मिला हाथ से मसल कर मर्तवान में डालते जायें। कुछ दिन रेखा रहने पर गुलकन्द तैयार हो जाता है।
कुछ लोग मर्तवान में नीचे थोड़ी मिश्री भी, डाल. दोनों की मिश्रित तइ लगाते हैं। इस प्रकार तहों को लगा कर सबसे ऊपर भी मिश्री की तह लगाते हैं, फिर मर्तवान का मुंह बन्द कर कपड़ मिट्टी करके एक मास तक रखते हैं–इस प्रकार बनाते हैं।
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