Kshar oil
क्षार तैल
गुण और उपयोग (Uses and Benefits):
- इस तैल के उपयोग से समस्त प्रकार के कर्णरोग जैसे कर्ण पूय (कान से मवाद या पीब आना)
- कर्ण नाद (कान में भाँति-भाँति के शब्द सुनाई देना)
- कर्ण शूल (कान का दर्द)
- बधिरता (बहरापन)
- कर्ण-कृमि (कान में कृमि उत्पन्न होना)
- कान-सम्बन्धी अन्यान्य रोगों एवं मुखरोगों को शीघ्र नष्ट करता है।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – मूली-क्षार, यवक्षार, सज्जीक्षार, सेंधानमक, सोचर नमक, विड्नमक, सामुद्र नमक, हींग, सहिजना की छाल, सोंठ, देवदारु, वच, कूठ, सौंफ, रसौत, पीपलामूल, नागरमोथा ये प्रत्येक द्रव्य १-१ तोला लेकर कल्क बनावें। इसमें सरसों का मूर्च्छित तेल 64 तोला, केले की जड़ का स्वरस, बिजौरा नींबू का रस, मधुशुक्त–ये प्रत्येक द्रव्य 3 से 5 तोला पृथक्-पृथक् लेकर सबको कड़ाही में एकत्र मिला तेल-पाक विधि से पाक करें। तेल का पाक सिद्ध हो जाने पर उतार कर छान लें और सुरक्षित रखें। : —शा. सं.
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