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    Post Views: 145 पुनर्नवारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से पाण्डु, इद्रोग, बढ़ा हुआ शोथ, प्लीहा, भ्रम, अरुचि, प्रमेह, गुल्म भगन्दर, अर्श, उदर रोग, खाँसी, श्वास, संग्रहणी, कोढ़, खुजली, शाखागत वायु, मल बन्ध, हिचकी, किलास, कुष्ठ और हलीमक रोग नष्ट होते हैं। इस अरिष्ट का प्रभाव वृक्क (मूत्रपिण्ड), यकृत-प्लीहा और हृदय पर…

  • Jwarkesri Ras

    Post Views: 27 ज्वर केसरी रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारां, शुद्ध गन्धक, शुद्ध विष, सोंठ, पीपल, काली मिर्च, हरे, बहेड़ा, आँवला और शुद्ध जमालगोटा प्रत्येक दवा समान भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना फिर उसमें अन्य औषधियों का चूर्ण मिला, भाँगरे के रस में एक…

  • Mahanarayan Tel

    Post Views: 92 महानारायण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल की मालिश करने से पसीने की दुर्गन्ध शीघ्र नष्ट होती है और समस्त प्रकार के वात रोगों को शीघ्र नष्ट करता है। इस तैल को पीने, अभ्यंग, मालिश करने, भोज्य सामग्री में मिलाकर खाने और बस्ति के रूप में सब प्रकार से…

  • Ashtdashang Loh

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  • Grahenikapat Ras( Second )

    Post Views: 27 ग्रहणीकपाट रस ( दूसरा ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, अतीस, बड़ी हरे, अभ्रक भस्म, यवक्षार, सज्जीखार, सुहागे की खील, मोचरस, बच और शुद्ध भॉग-समान भाग लेकर प्रथम पारद और गन्धक की कञ्जली बना उसमें शेष दवाओं का चूर्ण मिला, जम्बीरी नींबू…

  • Durvadi Ghrit

    Post Views: 114 दूर्वादि घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह घृत मुख से रक्त आता हो तो पीने को देना, नाक से रक्त आता हो तो नस्य देना, कान या आँख से रक्त आता हो, तो कान या आँख में डालना और लिङ्ग, योनि अथवा गुदा से रक्त आता हो तो उत्तर…