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  • Sirahshooladi Vajar Ras

    Post Views: 32 शिरःशूलादिवज्र रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, लौह भस्म, ताम्र भस्म–प्रत्येक 4-4 तोले, शुद्ध गुग्गुलु 16 तोले, त्रिफला चूर्ण 8 तोले तथा कूठ, मुलेठी, गोखरू, वायविडंग और दशमूल–प्रत्येक 1-1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक को कज्जली बना लें, फिर उसमें अन्य औषधियों का…

  • Laxmivilas Tel

    Post Views: 116 लक्ष्मीविलास तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल की मालिश करने से कठिन मस्तिष्क रोग शीघ्र नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त स्नायुगत रोग, स्नायविक दुर्बलता, प्रमेह, वात-व्याधि, मूर्च्छा, उन्माद, अपस्मार, ग्रहणी, पाण्डु रोग, शोष, नपुंसकता, वातरक्त, मूढ़ गर्भ, आर्तव और शुक्रगत दोषों को नष्ट करता है। यह तैल अत्यन्त पुष्टिकर…

  • Swarn Basant Malti Ras

    Post Views: 10 स्वर्ण वसन्तमालती मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  स्वर्ण भस्म या वर्क 1 तोला, मोती पिष्टी या भस्म 2 तोला, शुद्ध हिंगुल 3 तोला, काली मिर्च (छिलके उतार कर साफ की हुई लें) का कपड़छन किया हुआ चूर्ण 4 तोला, खर्पर भस्म या यशद भस्म 8 तोला…

  • Visham Jwarantak Loh

    Post Views: 306 विषम ज्वरान्तक लौह ( पुटपक्व ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस रसायन का सेवन करने से समस्त प्रकार के कठिन जीर्ण ज्वर रोग नष्ट होते हैं। विशेषतः विषम ज्वर में इसके प्रयोग से वरदान सदृश लाभ होता है। इसके अतिरिक्त वातज, पित्तज और कफोत्थ आठौं प्रकार कै ज्वर तथा एकतरा,…

  • Chandan Bala Lakshadi Tel

    Post Views: 122 चन्दन-बला-लाक्षादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह तेल खाँसी, श्वास, क्षय, छर्दि, रक्तप्रदर, रक्तपित्त, कफ रोग, दाह, कण्डू, विस्फोटक, शिरोरोग, नेत्रदाह, शरीर का दाह, सूजन, कामला, पाण्डु रोग और ज्वर का नाश करता है। इसके अतिरिक्त दाह, पाण्डु, छाती, कमर, हाथ-पाँव का जकड़ जाना, इनमें भी लाभदायक है। सूखी…