Mahanarayan Tel
महानारायण तैल
गुण और उपयोग (Uses and Benefits):
- इस तैल की मालिश करने से पसीने की दुर्गन्ध शीघ्र नष्ट होती है और समस्त प्रकार के वात रोगों को शीघ्र नष्ट करता है।
- इस तैल को पीने, अभ्यंग, मालिश करने, भोज्य सामग्री में मिलाकर खाने और बस्ति के रूप में सब प्रकार से प्रयोग होता है।
- इस तैल के सेवन से सभी प्रकार की वातव्याधि विशेषत एकांग वात, अर्दित और हस्त-पादादि कम्पन, पंगु (पीठ के बल चलना), वाधिर्य, शुक्रक्षय, मन्यास्तम्भ, हनुस्तम्भ और शिरः शूल आदि रोग शीध्र नष्ट होते हैं तथा बल-वर्ण की वृद्धि करता है।
- इस तैल के सेवन से बन्ध्या स्री सब प्रकार के योनि दोषों से मुकत होकर शूरवीर, सर्वगुणसम्पन्न, धारण-शक्ति एवं शोभायुक्त विनयशील सन्तान को उत्यन्न करती है।
- शाखाश्रितवात, कोष्ठगतवात, जिह्लास्तम्भ, दन्तमूल, उन्माद, कुब्जता, (कुबड़ापन), ज्वर आदि से कृश हुए मनुष्यों के लिए उत्तम लाभदायक है।
- इस तैल के प्रभाव से मनुष्य लक्ष्मीवान (शरीर. कान्तियुक्त), खीप्रिता, शरीर की प्रकर्षता आदि से युक्त होता है।
- वृद्धावस्था से मुक्त होकर शक्तिसम्पन्न हो चिर काल तक जीवित रहता है।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – बेल छाल, असगन्ध, बड्डी कटेरी, गोखरू, सोनापाठा, खरेंटी पंचांग, पारिभद्र, छोरी कटेरी, पुनर्नवामूल, गनियार (अरणीमूल), कंधी पं०, गन्धप्रसारणी, पाटला–ये प्रत्येक द्रव्य 1-1 प्रस्थ (80-80 तोला) लेकर जौकुट करके ।6 श्वेण (5 मन 4 सेर 4 तोला) जल में क्वाथ करेँ। 4 श्वेण (। मन १ सेर 6 तोला) जल शेष रहने पर उतार कर छान लें, फिर मूर्च्छित तिल तेल चार आढ़क (2 सेर 4 तोला), बकरी या गौ का दूध 4 आढक (2 सेर 4 तोला), शतावर का स्वरस या क्वाथ 4 आढ़क (2 सेर 4 तोला) लें और रास्ना, असगन्ध, सौंफ, देवदारु, कूठ, शालपर्णी, मुद्गपर्णी, अगर, नागकेशर, : सेंधानमक, जटामांसी, हल्दी, दारुहल्दी, छरीला, सफेद चन्दन, पोहकरमूल, छोटी इलायची, मंजीठ, मुलेठी, तगर, नागरमोथा, तेजपात, भागरा, जीवक, ऋषभक, काकोली, क्षीरकाकोली, मेदा, महामेदा, ऋद्धि-वृद्धि, सुगन्धबाला (खस), बच, पलासमूल, गठिवन, पुनर्नवामूल, चोरपुष्पी–ये प्रत्येक द्रव्य 2-2 पल (8-8 तोला) लेकर कल्क बनावें। फिर सब द्रव्यो को कड़ाही में एकत्र मिला, तेलपाक-विधि से तैल सिद्ध करें। पाक सिद्ध हो जाने परं उतार कर छान कर, उसमें कपूर, केशर, कस्तूरी–ये प्रत्येक द्रव्य 1- 1 पल (4-4 तोला) लेकर (रेक्टीफाइड स्पिरिट में मर्दन करके) मिलाकर, सुरक्षित रखें। — भैर. वक्तव्य द्रवद्वैगुण्य परिभाषा के अनुसार द्रव पदार्थों को द्विगुण लिया गया है। भै० र० में यह योग नारायण तैल (मध्यम) नाम से है, किन्तु वैद्य समाज में यह महानारायण तैल के नाम से प्रचलित है। कितने ही वैद्य इसे बिना केशर-कस्तूरी डाले भी बनाते हैं–यह उपरोक्त से किंचित् न्यून गुण होता है, किन्तु फिर भी बिना कस्तूरी डाले भी उत्तम लाभदायक होता है।
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