Similar Posts

  • Satnyesodhak Kwath

    Post Views: 35 स्तन्यशोधक क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) इस क्वाथ को बालक की माता को पिलाने से दूध शुद्ध होता है, जिससे बालक की प्रकृति स्वस्थ रहती है। अनेक माताओं के रक्त में जीर्ण उपदंश, सूजाक आदि रोगों का विष होता है और अनेक के अम्लपित्त और आमाशय या अन्त में क्षत…

  • Vidhyadhar Abhar Ras

    Post Views: 14 विद्याधराभ्र रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारद 9 माशे, शुद्ध गन्धक 1 तोला, लौह या मण्डूर भस्म 16 तोला, अभ्रक भस्म 4 तोला, वायविडंग, नागरमोथा, हरे, बहेड़ा, आँवला गिलोय, दन्दी मूल, निशोथ, चित्रक, सोंठ, मिर्च और पीपल–प्रत्येक 1-1 तोला लें। प्रथम मंडूकपर्णी के रस…

  • Amritarnava Ras

    Post Views: 37 अमृतार्णव रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   हिंगुलोत्थ पारा और शुद्ध गन्थक, लौह भस्म, सुहागे की खील, कैचूर, धनियाँ, सुगन्धवाला, नागरमोथा, पाठा, जीरा सफेद और अतीस प्रत्येक 1-1 तोला लें। प्रथम पारा- गन्धक की कज्जली बनावे और उसमें अन्य औषधियों का चूर्ण मिलाकर बकरी के…

  • Karpurasava

    Post Views: 248 कर्पूरासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- ये तीनों हैजा, अजीर्ण, बदहजमी, पेट के दर्द, जी मिचलाना आदि के लिये अक्सीर दवा है। कई बार का अनुभूत है। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): – उत्तम देशी मद्य 5 सेर, उत्तम कर्पूर 32 तोला और छोटी इलायची के…

  • Durvadi Ghrit

    Post Views: 114 दूर्वादि घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह घृत मुख से रक्त आता हो तो पीने को देना, नाक से रक्त आता हो तो नस्य देना, कान या आँख से रक्त आता हो, तो कान या आँख में डालना और लिङ्ग, योनि अथवा गुदा से रक्त आता हो तो उत्तर…

  • Tara Mandur

    Post Views: 239 तारा मण्डूर गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :-इसका उपयोग विशेष कर पक्तिशूल (भोजन पचने के समय जोरों से पेट में दर्द होना), पाण्डु (पीलिया), कामला, शूल, हाथ-पैर और सारे शरीर में सूजन, मन्दाग्नि, बवासीर, ग्रहणी, गुल्म, अम्लपित्त आदि रोगों में होता है। परिणामशूल में भी इससे काफी लाभ होता है। वक्तव्य…