Satnyesodhak Kwath
स्तन्यशोधक क्वाथ
गुण और उपयोग (Uses and Benefits)
- इस क्वाथ को बालक की माता को पिलाने से दूध शुद्ध होता है, जिससे बालक की प्रकृति स्वस्थ रहती है।
- अनेक माताओं के रक्त में जीर्ण उपदंश, सूजाक आदि रोगों का विष होता है और अनेक के अम्लपित्त और आमाशय या अन्त में क्षत होने पर रक्त में अपक्व रस का प्रवेश होकर स्तन्य अशुद्ध या विषमय बन जाता है।
- इस प्रकार दूषित स्तन्य पीने से बच्चा अस्वस्थ रहता है और अनेक प्रकार के विकारों से पीड़ित हो जाता है।
- इस प्रकार कितने ही बच्चों की ।-2 वर्ष के भीतर ही मृत्यु हो जाती है।
- ऐसी माताओं को स्तन्य का शोधन करने के लिए यह क्वाथ बहुत उपयोगी है।
- यदि पथ्य-पालन-सह मूलरोग का उपचार भी किया जाय, तो स्थायी एवं विशेष लाभ होता है।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – अनन्तमूल, पाढ़, देवदारु, चिरायता, मोरबेल (मूर्वामूल), कुटकी, गिलोय, तगर, सोंठ, नागरमोथा, इन्द्रजौ–प्रत्येक द्रव्य समान भाग लेकर जौकुट चूर्ण करें। पश्चात् 2 तोला चूर्ण को 1 पाव पानी में डालकर क्वाथ बनावें और 5 तोला शेष रहने पर उतार लें और छान कर मिलाकर पिलावें।