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    Post Views: 16 प्रदरान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, बंग भस्म, चाँदी भस्म, खपरिया (अभाव में यशद भस्म), कौड़ी भस्म—प्रत्येफ 3-3 माशे, लौह भस्म 3 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें, फिर उसमें अन्य औषधें मिलाकर सबको 1 दिन स्वारपाठे (घीकुमारी) के रस…

  • Parmeh Gajkesri Ras

    Post Views: 21 प्रमेहगजकेशरी रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  बंग भस्म, सुवर्ण भस्म, कान्त लौह भस्म, पारद भस्म या (रस-सिन्दूर), मोती भस्म या मोती पिष्टी, दालचीनी, छोटी इलायची, तेजपात और नागकेशर का चूर्ण समान भाग लेकर सबको एकत्र मिला, घृतकुमारी के रस में घोंटकर 1-1 रत्ती की गोलियाँ…

  • Dantodbhedantak Ras

    Post Views: 26 दन्तोदभेदगदान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पीपल, पीपलामूलं, चव्य, चित्रकमूल-छाल, सोंठ, अजमोद, अजवायन, हल्दी, मुलेठी देवदारु, दारुहल्दी, वायविडंग, छोटी इलायची, नागकेशर, नागरमोथा, कचूर, काकड़ासिंगी विड्नमक, अभ्रक भस्म, शंख भस्म, लौह भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म-प्रत्येक द्रव्य 1-1 भाग लेकर चूर्ण करने योग्य द्रव्यों का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण…

  • Shankar Loh

    Post Views: 295 शंकर लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह रसायन वात-पित्त, कुष्ठ, विषमज्वर, गुल्म, नेत्ररोग, पाण्डु रोग, अधिक निद्रा, आलस्य, अरुचि, शूल, परिणामशूल, प्रमेह, अपबाध्य, शोथ, विशेषतया रक्तस्राव, अर्श और वलीपलित रोगों के लिए अत्युत्तम हैं। यह बल, कान्ति तथा वीर्य-वर्द्धक है और शरीर को स्वस्थ एवं पुष्ट करके पुत्रोत्पादक शक्ति प्रदान…

  • Brahma Rasayanam

    Post Views: 281 ब्राह्म रसायन गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेक्न से शरीर की दुर्बलता और दिमाग की कमजोरी दूर होकर आयु, बल, कान्ति तथा स्मरण-शक्ति की वृद्धि होती है। इसके नियमित सेवन से खाँसी, दमा, क्षय, कब्जियत आदि दूर हो, शरीर में स्थायी ताकत पैदा होती है। यह उत्तम रसायन होने…

  • Triushanadi Mandur

    Post Views: 294 त्रिर्यूषणादि  मण्डूर गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से पाण्डु, कुप्ठ, शोथ, उदररोग, उरूस्तम्भ, कफ, अर्श, कामला, प्रमेह और प्लीहा का नाश होता तथा इसके सेवन से शरीर में नवीन रक्त की उत्पत्ति भी होती हे। पाण्ड्रोगी के लिए यह महौषध है, पाण्डुरोग में अन्न के प्रति अरुचि, ज्वर, जी…