Similar Posts

  • Ajeerankantak Ras

    Post Views: 26 अजीर्णकण्टक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  सुहागे की खील, पीपल, शुद्ध बच्छनाग औरं हिंगुल 1-1 तोला, काली मिर्च 2 तोला । सब चीजों को एकत्र कर कूटंने वाली दवा को कूट कर कपड़छन कर लें, फिर इसमें सिंगरफ और सुहागे की खील मिला जम्बीरी नींबू…

  • Loh Rasayan

    Post Views: 6 लौह रसायन मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 भाग, शुद्ध गन्धक 2 भाग लेकर कज्जली बनावे, पश्चात्‌ लौह भस्म 3 भाग मिलाकर एक प्रहर मर्दन करें, बाद में ग्वारपाठे के रस से तीन दिन तक धूप में मर्दन करें। गोला बनने योग्य होने पर…

  • Ashmari Har Kahsye

    Post Views: 49 अश्मरी-हर कषाय गुण और उपयोग (Uses and Benefits): यह कषाय अश्मरी (पथरी), शर्करा (पेशाब की नली में छोटी-छोटी कंकड़ी जैसा पत्थर हो जाना) और उससे होने वाले वृक्कशूल और पेट के दर्द में इसका प्रयोग किया जाता है। यह कषाय सौम्य गुणयुक्त होते हुए भी इसमें क्षार-पर्पटी या यवक्षार का मिश्रण हो…

  • Grahenikapat Ras( Second )

    Post Views: 27 ग्रहणीकपाट रस ( दूसरा ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, अतीस, बड़ी हरे, अभ्रक भस्म, यवक्षार, सज्जीखार, सुहागे की खील, मोचरस, बच और शुद्ध भॉग-समान भाग लेकर प्रथम पारद और गन्धक की कञ्जली बना उसमें शेष दवाओं का चूर्ण मिला, जम्बीरी नींबू…

  • Sarivadiasava

    Post Views: 311 सारिवाद्यासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह आसव 20 प्रकार के प्रमेह, पीड़िका, उपदंश और इसके उपद्रव, वातरक्त, भगन्दर, मूत्रकृच्छू, नाड़ीब्रण, पीब बहने वाले फोड़े-फुन्सियोँ आदि रोगों को नष्ट करता है। यह आसव रक्तशोधक, रक्तप्रसादक, मूत्रशोधक और पेशाब साफ लाने वाला है। अधिकतर प्रमेह रोग बहुत दिनों तक ध्यान में नहीं…

  • Bharangi Gud

    Post Views: 603 भार्गी गुड़ गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से दारुण श्वास तथा सब प्रकार के कास नष्ट होते हैं। यह स्वर को साफ करता और अग्नि (जठराग्नि) को प्रदीप्त करता है। पुराने कास-श्वास वाले रोगी के लिए यह अमृत के समान फायदा करता है, क्योंकि इसका प्रभाव वातवाहिनी तथा…