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  • Makardhwaj Gutika ( Swarn Kasturi Yukat )

    Post Views: 15 मकरध्वज गुटिका ( स्वर्ण-कस्तूरी-युक्त ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  जायफल, लौंग, कपूर, कालीमिर्च (छिलका उतारी हुई)–प्रत्येक 1-1 तोला स्वर्ण भस्म या वर्क 1 माशा, कस्तूरी 1 माशा, मकरध्वज 4 तोला 2 माशा लें। प्रथम मकरध्वज को खरल में डालकर सूक्ष्म मर्दन करें। पश्चात्‌ चूर्ण करने…

  • Updanshkuthar Ras

    Post Views: 31 उपदंशकुठार रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   कुंकुष्ठ (मूर्दासंग), कूठ दोनों एक-एक तोला लें तथा शुद्ध तूतिया आधा तोला, तीनों को खरल में पीसकर अदरक के रस के साथ घोटे। गोली बनाने योग्य होने पर एक-एक रत्ती की गोली बनाकर सुखाकर रख लें। र.चं. गुण और…

  • Jwarariabhar Ras

    Post Views: 22 ज्वरारि-अभ्र मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, अभ्रक भस्म, ताम्र भस्म प्रत्येक 1-1 तोला, धतूर-बीज 2 तोला और त्रिकुटा 5 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना फिर कपड़छन किए हुए अन्य औषधियों के महीन चूर्ण को मिलाकर जल से घोंट…

  • Pardarantak Loh

    Post Views: 266 प्रदरान्तक लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह रक्त और श्वेतप्रदर, कुक्षि, कटि और योनि-शूल, अरुचि, मन्दाग्नि आदि को नष्ट कर मासिक धर्म नियमित एवं साफ लाती है। पुराने एवं कष्टसाध्य प्रदर भी इसके सेवन से नष्ट हो जाते हैं। गर्भाशय एवं बीज-कोष की शिथिलता में इसका उपयोग करने से बहुत…

  • Chyavanprash

    Post Views: 397 च्यवनप्राशावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- अग्नि और बल का विचार कर क्षीण पुरुष को इस रसायन का सेवन करना चाहिए। बालक, वृद्ध, क्षत-क्षीण, स्त्री-संभोग से क्षीण, शोषरोगी, हदय के रोगी और क्षीण स्वरवाले को इसके सेवन से काफी लाभ होता है। इसके सेवन से खाँसी, श्वास, प्यास, वातरक्त, छाती…