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    Post Views: 321 वरुणाद्य लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- अश्मरी (पथरी), मूत्रकृच्छु, सूजाक आदि रोगों में पेशाब न होने के कारण असह्य वेदना होती है और रोगी कश्ट से चिल्लाने लगता है। उस समय इस दवा के सेवन से लाभ होता हैं। इस दवा का असर मूत्राशय और मूत्र-नली तथा वृक्कों पर…

  • Jaymangal Ras

    Post Views: 28 जयमंगल रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  हिंगुलोत्थ, पारा, शुद्ध गन्धक, सुहागे की खील, ताम्र भस्म, बंग भस्म, सोनामक्खी भस्म, सेंधा नमक, काली मिर्च-प्रत्येक एक-एक तोला, स्वर्ण भस्म 2 तोला, कान्तलौह भस्म तथा चाँदी भस्म 1-1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना फिर उसमें अन्य…

  • Vaat, Pitt and Kapha in Ayurveda

    Post Views: 733 त्रिदोष- वात, पित्त और कफ वायुः पित्तं कफश्चेति त्रयो दोषाः समासतः ।। ६ ।। (अ.ह.सू. अ.1) संक्षेप में तीन दोष हैं-वायु, पित्त और कफ ॥६॥ वक्तव्य — दोष का अर्थ दूषित करने वाली वस्तु है। ये वायु-पित्त-कफ शरीर को दूषित करते हैं इसीलिये चरक में कहा है-‘वायुः पित्तं कफश्चोक्तः शारीरो दोषसंग्रहः’ ये…

  • Grahenikapat Ras

    Post Views: 30 ग्रहणीकपाट रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 2 तोला, शुद्ध गन्धक 10 तोला, शुद्ध अफीम 4 तोला, कौड्डी भस्म 7 तोला, शुद्ध बच्छनाग विष 1 तोला, कालीमिर्च 8 तोला और शुद्ध धतूरे का बीज 20 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली करें, फिर सब…

  • Hemgarbh Potli

    Post Views: 7 हेमगर्भ पोट्टली रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा 4 तोला और स्वर्ण भस्म या वर्क 1 तोला लें। यदि भस्म न लेकर वर्क लिये हों, तो पारा वर्क को एकत्र मिलाकर खरल करें। जब स्वर्ण वर्क पारा में मिल जाय तो उसमें 10 तोला…

  • Pashupat Ras

    Post Views: 20 पाशुपत रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, तीक्ष्ण लोहभस्म 3 तोला और शुद्ध बच्छनाग 6 तोला लें। प्रथम पारा-गंधक की कज्जली बना, फिर अन्य औषधें मिला, सबको एक दिन चित्रकमूल के क्वाथ में घोंटें। फ़िर सोंठ, पीपल, मिर्च…