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  • Dashmool Tel

    Post Views: 241 दशमूल तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तैल की मालिश करने से समस्त प्रकार के शिरो रोग एवं वात रोगों से शीघ्र लाभ होता है तथा अस्थिगत, सन्धिगत और कफ प्रधान रोग नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त कान या नाक के दर्द में भी 3-4 बूँद डालने से अच्छा लाभ…

  • Hardyearnava Ras

    Post Views: 6 हृदयार्णव रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक और ताम्र भस्म 1-1 तोला लेकर तीनों को एकत्र कज्जली बना, 1-1 दिन त्रिफला और मकोय के रस में मर्दन कर, चना-प्रमाण की (एक-एक रत्ती) गोलियाँ बना, सुखा कर रख लें। मात्रा और अनुपान  (Dose…

  • Sidhvardamrit Ras

    Post Views: 9 सिद्धवरदामृत रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  चार तोला की शुद्ध हिंगुल की एक डली लेकर उसको चारों ओर से सूत के तागे से खूब अच्छी तरह से लपेट दें। पश्चात्‌ इसको एक लोहे की कड़ाही या कड़ाही सदृश मिट्टी के पात्र में रखकर चूल्हे पर…

  • Dhatri Loh

    Post Views: 300 धात्री लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह परिणामशूल (खाने के बाद पेट में दर्द होना), पंक्तिशूल (भोजन पचने के समय पेट में दर्द होना), अजीर्ण, अम्लपित्त, कब्ज, गले में जलन, खट्टी डकारे आना आदि पैत्तिक रोगों में बहुत शीघ्र लाभ करता है। इसके सेवन सें पाचनविकार अच्छा होता तथा नेत्रों…

  • Vatgajankush Ras

    Post Views: 44 वातगजांकुश रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पारद भस्म (रससिन्दूर), लौह भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, शुद्ध गन्धक, शुद्ध हरताल, हर्रे, ककड़ासिंगी, शुद्ध बच्छनाग, सोंठ, मिर्च, पीपल, अरनी की जड़ की छाल, सुहागा प्रत्येक समान भाग लें। प्रथम पारा-गन्धक को कज्जली बना लें, फिर उसमें काष्ठौषधियों का कपड़छन…