Updanshkuthar Ras
उपदंशकुठार रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – कुंकुष्ठ (मूर्दासंग), कूठ दोनों एक-एक तोला लें तथा शुद्ध तूतिया आधा तोला, तीनों को खरल में पीसकर अदरक के रस के साथ घोटे। गोली बनाने योग्य होने पर एक-एक रत्ती की गोली बनाकर सुखाकर रख लें। र.चं.
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- नए एवं पुराने उपदंश रोग को नष्ट करने में इसका उपयोग किया जाता है।
- इसके एक या दो सप्ताह सेवन करने से ही रोग ठीक हो जाता है।
- विकार अधिक उद्र रूप में हो तो तीन या चार सप्ताह तक भी सेवन किया जा सकता है।
- सूचना : इसके प्रयोग काल में मीठे और खट्टे पदार्थ, मांस, दूध, कुष्माण्ड (कुम्हड़ा) का सेवन नहीँ करना चाहिए।
- कुछ चिकित्सकों का मत है कि इसके सेवन में तूतिया के कारण किसी को वमन हो तो उस रोगी को आम का अचार या निम्बू खिलाना चाहिए इससे तुत्थ की वमन कराने की शक्ति कम हो जाती है।