Similar Posts

  • Navayas Loh / Mandur

    Post Views: 294 नवायस मण्डूर /  लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह लौहकल्प पाचक, दीपक, रसायन और रक्‍तवर्धक है। इसके सेवन से रक्ताणुओ की वृद्धि होती और रक्त-गति का कार्य भी ठीक-ठीक होने लगता है। प्लीहा के दोष या पेट की खराबी से होने वाले बुखार में इस दवा से अच्छा लाभ…

  • Pardarari Loh

    Post Views: 357 प्रदरारि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- रक्त-स्राव को रोकने के लिए केवल लौह-भस्म ही काफी है। परन्तु अन्य रक्तरोधक यथा–कुटज छाल, मोचरस आदि दवाओं के संमिश्रण से यंह बहुत ही गुणकारी दवा बन जाती है। अतएव, रक्तप्रदर में इससे शीघ्र शमन होता है। रक्तपित्त और रक्तार्श (खूनी बवासीर) में…

  • Ekangvir Ras

    Post Views: 42 एकांगवीर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   रससिन्दूर, शुद्ध गन्धक, कान्त लौह भस्म, बंग भस्म, नाग भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, तीक्ष्ण लौह भस्म, सोंठ, मिर्च, पीपल सब समान भाग लेकर चूर्ण करने योग्य दवाओं को कूट-कपड़छन चूर्ण कर, भस्मादिक दवा मिला, । दिन तक खूब…

  • Baljwarankush Ras

    Post Views: 14 बालज्वरांकुश रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पारद भस्म (रससिन्दूर), अभ्रक भस्म, बंग भस्म, चाँदी भस्म 1-1 तोला, ताम्र भस्म और फौलाद भस्म तथा सोंठ, मिर्च, पीपल, बहेड़ा, कसीस भस्म 2-2 तोला लेकर सब का महीन चूर्ण करके, उसे पान के रस की कई भावनाएँ देकर…

  • Panchgun Tel

    Post Views: 278 पंचगुण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): संधिवात में और शरीर के किसी भी अवयव में शूल (दर्द) में हल्के हाथ से मालिश करें। कर्णशूल में कान में डालें। सब प्रकार के वर्णों में ब्रण क़ो नीम और सम्भालू की बत्ती के क्वाथ से धोकर, उस पर इस तैल में भिंगोई…

  • Ajeerankantak Ras

    Post Views: 26 अजीर्णकण्टक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  सुहागे की खील, पीपल, शुद्ध बच्छनाग औरं हिंगुल 1-1 तोला, काली मिर्च 2 तोला । सब चीजों को एकत्र कर कूटंने वाली दवा को कूट कर कपड़छन कर लें, फिर इसमें सिंगरफ और सुहागे की खील मिला जम्बीरी नींबू…