Baljwarankush Ras
बालज्वरांकुश रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – पारद भस्म (रससिन्दूर), अभ्रक भस्म, बंग भस्म, चाँदी भस्म 1-1 तोला, ताम्र भस्म और फौलाद भस्म तथा सोंठ, मिर्च, पीपल, बहेड़ा, कसीस भस्म 2-2 तोला लेकर सब का महीन चूर्ण करके, उसे पान के रस की कई भावनाएँ देकर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना, सुखा कर रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1-1 गोली सुबह-शाम मधु के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- इस रसायन का उपयोग विशेषतः कफजन्य बीमारियों में किया जाता है।
- छोटे-छोटे बच्चों को सर्दी (कफ) के कारण ज्वर (बुखार), पतले दस्त, कभी-कभी दूध पीना भी बन्द कर दें कफ के मारे बच्चा परेशान रहे, ऐसी हालत में इस रसायन के उपयोग से बहुत फायदा होता हैं।
- कफ-वृद्धि के कारण दूध का पाचन ठीक तरह से न होना, उल्टी हो जाना, दस्त सफेद, पतला तथा फटा हुआ होना, ज्वर रहना, खाँसी, श्वास फूलना आदि कारणों की उपस्थिति होने पर भी इस रसायन के उपयोग से लाभ होता है। गर्भिणी coughस्त्री को हुए ज्वर में भी इसके प्रयोग से श्रेष्ठ लाभ होता है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
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