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    Post Views: 28 महामंजिष्ठादि क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) इस क्वाथ के सेवन से महाकुष्ठ, क्षुद्र कुष्ठ, वातरक्त, सुनबहरी, वात, ब्रण (घाव), दाह, सुई चुभोने जैसी पीड़ा, उपदंश, शरीर पर लाल-लाल चकत्ते पड़ जाना, अर्दित, पक्षाघात, नेत्ररोग, मेदरोग, श्लीपद (फीलपाँव) तथा रक्तमंडल आदि दोष नष्ट होते हैं। इसको आठ गुने जल में 4…

  • Mahamanjitharisth

    Post Views: 136 महामञ्जिष्ठादारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस औषधि के उपयोग से कुठ रोग, वातरक्त, अर्दित, मेदोवृद्धि, शलीपद (फीलपांव) रोग शीघ्र नष्ठ होते हैं। इसके अतिरिक्त रक्तदुष्टिजन्य त्वचारोग, खाज-खुजली, फोड़े-फुन्सी आदि में अकेला या गन्धक रसायन अथवा शुद्ध गन्धक या रसमाणिक्य या अन्य किसी रक्‍तदुष्टिनाशक औषधि के अनुपान के साथ इसके प्रयोग…

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    Post Views: 30 स्तन्यशोधक क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) इस क्वाथ को बालक की माता को पिलाने से दूध शुद्ध होता है, जिससे बालक की प्रकृति स्वस्थ रहती है। अनेक माताओं के रक्त में जीर्ण उपदंश, सूजाक आदि रोगों का विष होता है और अनेक के अम्लपित्त और आमाशय या अन्त में क्षत…

  • Chaturmukh Ras

    Post Views: 25 चतुर्मुख रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, लौह भस्म और अभ्रक भस्म 4-4 तोला तथा स्वर्ण भस्म 1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना उसमें अन्य भस्में मिला, घृतकुमारी-रस में घॉटकर गोला बना, धूप में सुखा, एरण्ड-पत्र में लपेट, सूत से…

  • Gandmalakandan Ras

    Post Views: 30 गण्डमालाकण्डन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा तोला, शुद्ध गन्धक आधा तोला, ताम्र भस्म 1 तोला, मण्डूर भस्म्‌ 3 तोला, सोंठ, मिर्च, पीपल 2-2 तोला, सेंधा नमक आंधा तोला, कचनार की छाल का चूर्ण, गुग्गुलु 12-12 तोला लें। पहले पारा और गन्धक की कज्जली…