Similar Posts

  • Dantodbhedantak Ras

    Post Views: 28 दन्तोदभेदगदान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पीपल, पीपलामूलं, चव्य, चित्रकमूल-छाल, सोंठ, अजमोद, अजवायन, हल्दी, मुलेठी देवदारु, दारुहल्दी, वायविडंग, छोटी इलायची, नागकेशर, नागरमोथा, कचूर, काकड़ासिंगी विड्नमक, अभ्रक भस्म, शंख भस्म, लौह भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म-प्रत्येक द्रव्य 1-1 भाग लेकर चूर्ण करने योग्य द्रव्यों का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण…

  • Dhatri Loh

    Post Views: 293 धात्री लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह परिणामशूल (खाने के बाद पेट में दर्द होना), पंक्तिशूल (भोजन पचने के समय पेट में दर्द होना), अजीर्ण, अम्लपित्त, कब्ज, गले में जलन, खट्टी डकारे आना आदि पैत्तिक रोगों में बहुत शीघ्र लाभ करता है। इसके सेवन सें पाचनविकार अच्छा होता तथा नेत्रों…

  • Trivikram Ras

    Post Views: 22 त्रिविक्रम रस अशमरी मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  ताम्र भस्म 20 तोला को 20 तोला बकरी के दूध में मन्दाग्नि पर पकावें। जब सब दूध सूख जाय, तब 20 तोला पारा और 20 तोला शुद्ध गन्धक डाल, कज्जली बना, सब को 1 दिन सम्भालू के पत्तों…

  • Dashmool Tel

    Post Views: 230 दशमूल तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तैल की मालिश करने से समस्त प्रकार के शिरो रोग एवं वात रोगों से शीघ्र लाभ होता है तथा अस्थिगत, सन्धिगत और कफ प्रधान रोग नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त कान या नाक के दर्द में भी 3-4 बूँद डालने से अच्छा लाभ…

  • Bhuvneshwar Ras

    Post Views: 27 भुवनेश्वर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  सेन्धा नमक, हरड़, बहेड़ा, आँवला, अजवायन, बेलगिरि, गृहधूम (घर का धुआँ)–ये प्रत्येक द्रव्य 1-1 भाग लेकर समस्त द्रव्यो को कूटकर सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण करें। पश्चात्‌ खरल में डालकर जल के साथ मर्दन कर 3-3 रत्ती की गोली बना, सुखाकर…

  • Sundrikalp

    Post Views: 134 सुन्दरीकल्प गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : मात्रा और अनुपान गुण और उपयोग स्त्री रोगनाशक, अनेक उत्तमोत्तम औषधियों के मिश्रण से निर्मित इस महौषधि के सेवन से खरियों को होने वाले समस्त प्रकार के रोग शीघ्र नष्ट होते हैं-तथा रक्तप्रदर, श्वेत प्रदर, कष्टार्तव, पाण्डु, गर्भाशय तथा योनिभ्रंश, डिम्बग्रन्थि-प्रदाह, हिस्टीरिया, बन्ध्यापन, ज्वर, रक्तपित्त,…