Similar Posts

  • Bhringraj Tel

    Post Views: 115 भृङ्गराज तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): यह तैल नित्य सिर पर लगाने से सिर के बाल बढ़ते हैं तथा सिर का दर्द, बाल सफेद होना और गिरना ये रोग अच्छे होते हैं। बराबर इस तैल को सिर में लगाने से बाल न तो जल्दी पकते हैं और न झड़ते ही…

  • Amritmanjari Gutika

    Post Views: 252 अमृतमञ्जरी गुटिका  गुण और उपयोग (Uses and Benefits– इस वटी का उपयोग करने से कठिन सन्निपात रोग शीघ्र नष्ट होते हैं और समस्त प्रकार के अग्निमांद्य, अजीण, भयंकर आमवात आदि रोगों को शीघ्र नष्ट करती है। इसके अतिरिक्त पाँचों प्रकार के कास रोग और श्‍वास रोग सम्पूर्ण अंग जकड़ जाना, जीर्ण ज्वर,…

  • Varunadi Loh

    Post Views: 307 वरुणाद्य लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- अश्मरी (पथरी), मूत्रकृच्छु, सूजाक आदि रोगों में पेशाब न होने के कारण असह्य वेदना होती है और रोगी कश्ट से चिल्लाने लगता है। उस समय इस दवा के सेवन से लाभ होता हैं। इस दवा का असर मूत्राशय और मूत्र-नली तथा वृक्कों पर…

  • Kumar Kalyan Ras

    Post Views: 42 कुमारकल्याण रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  रससिन्दूर, मोती भस्म, स्वर्ण भस्म, अभ्रक भस्म, लौह, भस्म और सोनामक्खी भस्म बराबर-बराबर लेकर घीकुमारी के रस में घोंट कर मूँग के समान गोलियाँ बना लें। वक्तव्य : मूँग स्थान भेद से छोटे-बड़े होते हैं। अतः आधी-आधी रत्ती वजन…

  • Nirpati vallabh Ras

    Post Views: 20 नृपतिवल्लभ रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, ताम्र भस्म, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, सुहागे की खील, जायफल, लौंग, नागरमोथा, दालचीनी, छोटी इलायची, भुनी हींग, जीरा, तेजपात, अजवायन, सोंठ, सेंधा नमक–प्रत्येक 4-4 तोला और काली मिर्च 8 तोला लें। प्रथम पारा- गन्धक की…

  • Vatsakadi Kwath

    Post Views: 81 वत्सकादि क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits) आमातिसार रक्तातिसार नये-पुराने अतिसार में इसके उपयोग से लाभ होता है। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)– इसमें से 4 तोला चूर्ण लेकर 6 तोला जल मैं क्वाथ करेँ। 4 तोला जल शेष रहने पर छान कर सेवन करें। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main…