Nirgundi Tel
निर्गुण्डी तैल
गुण और उपयोग (Uses and Benefits)
- यह तेल गण्डमाला अपची, नाड़ीब्रण (नासूर), दुष्टवर्ण, अदृष्ट्रवर्ण (Carbuncle) आदि रोगों में नस्य लेने एवं लगाने के काम में उपयोग किया जाता है।
- इसके प्रयोग से इन रोगों में बहुत उत्तम लाभ होता है।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – तिल तेल मूर्च्छित 108 तोला लेकर उसमें कलिहारि-मूल 16 तोला का कल्क तथा निर्गुण्डी (सम्भालू) स्वरस 512 तोला मिला सब को कड़ाही में डालकर तैलपाक विधि से तेल सिद्ध कर के छानकर पात्र में रख लें। –भै. र.
वक्तव्य : द्रव पदार्थों को द्रवद्वैगुण्य परिभाषा के अनुसार द्विगुण लिया गया है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
Book Your Online Consultation