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    Post Views: 97 गुडूच्यादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तेल की मालिश करने से वातरक्त, तिमिर रोग, कुष्ठरोग, त्वचा के विकार, विसर्प, पसीना अधिक आना, खुजली और दाह आदि रोग नष्ट होते हैं। मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  मूर्च्छित तिल तेल 28 तोला, गिलोय का…

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    Post Views: 299 चन्दनादि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- लौह भस्म का यह सौम्य योग है। बार-बार आने वाला पारी का ज्वर, विषमज्वर तथा जीर्णज्चर में इसका अच्छा असर होता है। यह पाचन विकार को ठीक करके बढ़ी हुई रक्त की गति को ठीक कर देता है। नेत्रदाह (आँखों में जलन), सिर…

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  • Trilokyechintamani Ras

    Post Views: 25 त्रैलोक्यचिन्तामणि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, हीरा भस्म (अभाव में वैक्रान्त भस्म), स्वर्ण भस्म, चाँदी भस्म, ताम्र भस्म, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, मोती भस्म, शंख भस्म, प्रवाल भस्म, शुद्ध हरताल और शुद्ध मैनशिल-प्रत्येक समभाग लेकर प्रथम पारद-गन्धक की कज्जली -बना फिर…