Dhatupostik Churan
धातुपौष्टिक (शतावर्यादि) चूर्ण
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : शतावरी, गोखरू बीज बड़ा, बीजबन्द, बंशलोचन, कबानचीनी, चोपचीनी, कोंच के बीज, सफेद मूसली, काली मूसली, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, सालम मिश्री गट्टा, बिदारीकन्द, असगन्ध-प्रत्येक १-१ तोला,निशोथ ६ तोला, मिश्री २० तोला-सब को एकत्र कट कर चर्ण बना लें। –आ. प्र वक्तव्य–स्याह मूसली के स्थान पर विधारामूल डालने से भी अच्छा बनता है। अधिक समय के लिये टिकाऊ बनाना हो तो मिश्री बिना मिलाये ही रख लें। मिश्री सेवनकरते समय बराबर परिमाण में मिलाकर सेवन किया जाय। हम बिना मिश्री मिलाये ही बनाते हैं।
मात्रा और अनुपान–६ माशा से १ तोला, सुबह-शाम गाय के दूध के साथ दें।
गुण और उपयोग–
- यह चूर्ण पौष्टिक, धातुवर्द्धक और वीर्य को गाढ़ा करने वाला है।
- इसके सेवन से धात् गाढ़ा हो जाता और स्वप्नदोष दूर होकर शरीर हुष्ट-पुष्ट बन जाता है।
- नोट–यह चूर्ण गरिष्ठ (बहुत देर में पचनेवाला) है। अतएव इसका सेवन मन्दारिन वाले को नहीं करना चाहिए।
- जिनकी जठराग्नि तेज हो वही इसके सेवन से लाभ उठा सकते हैं।
- इसके सेवन काल में गाय के दध का सेवन अवश्य करना चाहिए।
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