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    Post Views: 225 अग्निमुख चूर्ण (दूसरा ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: भूनी हुई हींग 1 तोला, बच 2 तोला, पीपल 3 तोला, सोंठ 4 तोला, अजवायन 5 तोला, हर्रे 6 तोला, चित्रक मूल की छाल 7 तोला और कूठ 8 तोला इन सबको कूट, कपड़छन कर महीन चूर्ण बना सुरक्षित रख लें। मात्रा और…

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    Mahatikat Ghrit

    Post Views: 185 महातिक्त घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह घृत कुष्ठ, रक्तपित्त, खूनी बवासीर, विसर्प, अम्लपित्त, वातरक्त, -पाण्डु रोग, विस्फोट, यक्ष्मा, उन्माद, कामला, -पामा, कण्डू, जीर्णज्चर, रक्तप्रदर आदि रोगों को नष्ट करता है। शरीर पर लाल चकत्ते हो जाना, फोड़े-फुन्सी होना, उनमें दाह या जलन रहना, पीब या पानी-सा लेस निकलता हो,…

  • Ashokarist

    Post Views: 194 अशोकारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- स्त्रियों को होनेवाले प्रमुख रोग यथा–रक्त-शवेत प्रदर, पीड़ितार्तव, पाण्डु, गर्भाशय व योनि भ्रंश, डिम्बकोष प्रदाह, हिस्टीरिया, वन्ध्यापन तथा ज्वर, रक्तपित्त, अर्श, मन्दाग्नि, सूजन, अरुचि इत्यादि रोगों को नष्ट करता है। अशोकारिष्ट में अशोक की छाल की ही प्रधानता है। अशोक की कई जातियां होती…

  • Kalyan Avleh

    Post Views: 147 कल्याणावलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस योग का पथ्यपूर्वक 21 दिन तक सेवन करने सें मनुष्य श्रुतिधर (सुनकर ही बातों का स्मरण रखने वाला) हो जाता है। बादल तथा दुन्दुभी के समान गर्जन करने वाला एवं मत्त कोकिल के समान स्वर वाला हो जाता है। इसके अतिरिक्त जड़ता, गद्गद…

  • Narikel Khand Pak

    Post Views: 313 नारिकेल खण्डपाक इसके सेवन सें पुरुषत्व, निद्रा और बल की वृद्धि होती है तथा अम्लपित्त, परिणामशूल और क्षय का नाश होता है। गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसमें प्रधान द्रव्य नारियल है, जिससे शीतवीर्य, स्निग्ध और पौष्टिक होने के कारण इस पाक का प्रयोग पैत्तिक बीमारियों में तथा शुक्र-क्षयादि के…

  • Karpuradi Churan

    Post Views: 317 कर्पूरादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: कपूर, दालचीनी, कंकोल, जायफल, तेजपत्ता – प्रत्येक 1-1 तोला, लौंग 1 तोला, जटामांसी 2 तोला, कालीमिर्च 3 तोला, पीपल 4 तोला, सोंठ 5 तोला और मिश्री या चीनी सब दवा के बराबर लेकर यथाविधि चूर्ण बना लें। वक्तव्य योगरत्नाकर में जटामांसी के स्थान पर नागकेशर…