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  • Gulkand

    Post Views: 186 गुलकन्द गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसका प्रयोग करने से दाह, पित्तदोष, जलन, आन्तरिक गरमी बढ़ना और कब्ज के विकार नष्ट होते हैं तथा मस्तिष्क को शान्ति पहुँचाता है। इसके सेवन से स्त्रियों के गर्भाशय की गरमी शमित होकर अत्यार्तव (मासिक धर्म में अधिक रक्त जाना) रोग नष्ट होता है।…

  • Tapyadi Loh

    Post Views: 201 ताप्यादि लौह नं०1 ( रौप्यभस्म युक्त ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से पाण्डु, कामला, यकृत्‌ एवं प्लीहा के विकार, रक्त की कमी, सूजन स्त्रियों के मासिक धर्म की गड़बड़ी आदि रोग अच्छे होते हैं। मलेरिया के बाद उत्पन्न एनीमिया की यह सबसे अच्छी दवा है। इससे खून की…

  • Sheet Jwaradi Ras

    Post Views: 9 शीतज्वरादि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध मैनशिल, शुद्ध हरताल, ताँबे की भस्म, शुद्ध तृतिया-प्रत्येक 1-1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावें, फिर उसमें अन्य औषधें मिलाकर सबको त्रिफला के क्वाथ में खरल कर गोला बना, सराब-सम्पुट में बन्द कर…

  • Vatvidhvanshan Ras

    Post Views: 16 वातविध्वंसन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, नाग भस्म, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, ताम्र भस्म, पीपल, सुहागे की खील, कालीमिर्च और सोंठ–प्रत्येक 1-1 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना, फिर उसमें अन्य औषधियों का कपड़छन किया हुआ महीन चूर्ण मिला, सबको…

  • Triphala Mandur

    Post Views: 251 त्रिफला मण्डूर गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह मण्डूर अम्लपित्त रोग में उत्पन्न होने वाले दर्द के लिए अच्छा है। इसके सेवन से पाण्डु, कामला, कब्ज आदि रोग अच्छे हो जाते हैं। विशेष कर प्लीहा की क्रिया को यह ठीक करता है। मलेरिया ज्वर के कारण प्लीहा-वृद्धि और ज्वर को…