Kumarkalyan Ghrit
कुमारकल्याण घृत
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- इस घृत के सेवन से बल, वर्ण, रुचि, जठराग्नि, मेधा और कान्ति बढ़ती है।
- दाँत आने के समय बालकों को इसके सेवन कराने से बिना उपद्रव के दाँत निकल आते हैं।
- बालशोष में 3 माशा इस घृत में 2 रत्ती गोदन्ती भस्म और 4 रत्ती सितोपलादि चूर्ण मिलाकर चटाने से अच्छा लाभ होता है। कुछ समय में ही शोष नष्ट होकर बच्चा हष्ट-पुष्ट हो जाता है।
- बालकों को होने वाले कुक्कुर खांसी में भी 3 माशा इस घृत में सितोपलादि चूर्ण 6 रत्ती मिलाकर दिन-रात में 2-4 बार देने से बहुत जल्दी आराम होता है।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan) :- 3 से 6 माशे गरम दूध में डाल कर पिलावें।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – शंखाहुली, बच, ब्राह्मी, कूठ, हरड़, बहेड़ा, आँवला, मुनक्का, मिश्री, सोंठ, जीवन्ती, . जीवक, बरियार, कचूर, धमासा, बेल, अनार, तुलसी, सरिबन, नागरमोथा, पुष्करमूल, छोटी इलायची, छोटी पीपल, खस, गोखरू, अतीस, आकनादिपाठा, वायविडंग, देवदारु, मालती के फूल, महुआ के फूल, पिंड खजूर, मीठे बेर और बंशलोचन सब समभाग लें। कूट कपड़छन कर जल में पीस, उससे चौगुना गाय का घी तथा दूध एवं छोटी कटेरी का क्वाथ घी से चौगुना मिलाकर घृतपाक-विधि से पकावें। जब घृत तैयार हो जाय, तब कपड़े से छान कर शीशी में भर लें। —सि. यो. सं.
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