Ardhangvatari Ras
अर्धाङ्गवातारि रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध पारद 20 तोला, ताम्र भस्म 4 तोला दोनों को खरल में डालकर जम्बीरी नींबू के रस में एक दिन घोंटें, पश्चात् सूख जाने पर शुद्ध गन्धक 20 तोला मिला कज्जली करके नागरपान के रस में घोंटकर गोला या टिकिया बनाकर सुखाकर बड़ी मूषा में रखकर मुंह बन्द करके (ढक्कन लगा कपड़मिट्टी से सन्धि-रोध करके) सुखाकर लघुपुट देकर पकावें। स्वांगशीतल होने पर मूषा का ढक्कन हटाकर रस को निकाल कर खरल में पीसकर रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1 से 2 रत्ती तक त्रिकटु चूर्ण 4 रत्ती और मधु में मिलाकर दें। गुण और
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- यह रसायन अद्धाङ्गवात में श्रेष्ठ लाभदायक महौषधि है।
- कफ तथा पित्त प्रकृति वाले, मेदस्वी तथा मन्दाग्नि वाले अर्द्धाङ्गवात के रोगियों को इसके प्रयोग से विशेष लाभ होता है, क्योंकि इसमें पारद का ताम्रभस्म के साथ संयोग होने के कारण यह रस तीक्ष्ण प्रभावशाली होकर कफ, मेदवृद्धि, मन्दाग्नि, पित्तदोष इनको मिटाकर अरद्धाङ्गवात का शमन करता है।
- इस रस की तीक्ष्णता एवं उष्णता के कारण वातवाहिनियों एवं रक्तवाहिनियों में जमे हुए कफ और मेद को गलाकर अथवा जलाकर नष्ट करके उनकी क्रिया को सुव्यवस्थित करता है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
Book Your Online Consultation