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    Post Views: 201 ताप्यादि लौह नं०1 ( रौप्यभस्म युक्त ) गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से पाण्डु, कामला, यकृत्‌ एवं प्लीहा के विकार, रक्त की कमी, सूजन स्त्रियों के मासिक धर्म की गड़बड़ी आदि रोग अच्छे होते हैं। मलेरिया के बाद उत्पन्न एनीमिया की यह सबसे अच्छी दवा है। इससे खून की…

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    Post Views: 119 कुम्भी तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : कान के रोगों में इस तैल का व्यवहार किया जाता है। इससे कान का दर्द, कान का पकना, मवाद आना आदि रोग दूर हो जाते हैं। कान के अन्दर फोड़ा-फुन्सी हो जाने से वह पक कर बहने लगता है। यदि कहीं अधिक दिन तक…

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    Post Views: 281 अग्निमुख मण्डूर गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से शोथ (सूजन) और पाण्डु रोग का नाश होता हैं। पाण्डु रोग पुराना हो जाने पर शरीर में जल भाग की वृद्धि हो जाती है, जिससे शरीर फूल जाता है। इसमें भूख नहीं लगती, मन्दाग्नि, अपचन, बद्धकोष्ठता आदि उपद्रव उत्पन्न होते…