Kumbhi Tel
कुम्भी तैल
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- कान के रोगों में इस तैल का व्यवहार किया जाता है।
- इससे कान का दर्द, कान का पकना, मवाद आना आदि रोग दूर हो जाते हैं।
- कान के अन्दर फोड़ा-फुन्सी हो जाने से वह पक कर बहने लगता है।
- यदि कहीं अधिक दिन तक मवाद बहता रहा, तो सुनाई भी कम पड़ने लगता है।
- ऐसी हालत में पहले नीम के पत्ते डालकर गर्म किए हुए पानी से पिचकारी द्वारा कान साफ करके यह तैल दिन में दो-तीन बार डालने से बहुत शीघ्र लाभ होता है।
- इसके अतिरिक्त कान में मैल जम जाने अथवा कान की जड़ में चोट लगने से यदि दर्द हो, तो उस हालत में भी इससे बहुत लाभ होता है।
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – जल-कुम्भी का कल्क 16 तोला, तिल का तैल 64 तोला और जल कुम्भी का स्वरस 256 तोला-सबको तैलपाक-विधि से पकावें। जब तैल सिद्ध हो जाय, तब उसको कपड़े से छान कर शीशी में भर लें। -~सि. यो. सं
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