Som Yog
सोम योग
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – रससिन्दूर 1 भाग, सोम (सोमलता) चूर्ण 20 भाग लेकर प्रथम रससिन्दूर को खरल में डालकर सूक्ष्म मर्दन करें, पश्चात् उसमें सोमलता का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण मिला अच्छी तरह मर्दन करें। पश्चात् शीशी में भरकर सुरक्षित रखें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan) :- 5 से 10 रत्ती तक अकेला या अभ्रक भस्म या भागोत्तरगुटिका अथवा चन्द्रामृत रस के साथ मिलाकर जल या मधु के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- इस औषधि का प्रयोग करने से समस्त प्रकार के कठिन श्वास रोग नष्ट होते हैं।
- श्वास (दमा) का दौरा उठने की अवस्था में इस औषधि के सेवन से दौरे का वेग कम हो जाता है तथा कफ पतला होकर सरलता से बाहर निकल जाता है और रोगी शीघ्र ही शान्ति अनुभव करने लगता है।
- इसके अतिरिक्त समस्त प्रकार के कास रोग, पार्श्वशूल, न्यूमोनिया आदि में भी उचित अनुपान के साथ सेवन करने से आशाप्रद लाभ होता है।
- न्यूमोनिया (पार्श्वशूल) में शृंग भस्म और हृदय रोग में प्रवालपिष्टी और शृंग भस्म के साथ मिलाकर देना विशेष लाभकारी है। कफ प्रधान श्वास रोग में कुछ समय निरन्तर सेवन कराने से बहुत उत्तम लाभ होता है।
- इस योग से कई रोगियों को तो जड़ से ही इस रोग से छुटकारा मिलते देखा गया है, एवं शरीर में रस-रक्तादि धातुओं की वृद्धि होकर शरीर हृष्ट-पष्ट एवं कान्तिमान हो जाता है, ऐसा हमारा अनेक बार का अनुभव हैं।
- आचार्य श्री यादवजी त्रिकमजी ने इस योग पर बहुत बार प्रयोग कर बड़ा उत्तम अनुभव किया है।
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