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    Post Views: 186 सारस्वतारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से आयु, वीर्य, धृति, मेधा (बुद्धि), बल, स्मरणशक्ति और कान्ति की वृद्धि होती है। यह रसायन–हद्य अर्थात्‌ हृदय के रोगों को दूर करने वाला या हृदय को बल प्रदान करने वाला है। बालक, युवा (जवान), वृद्ध, स्री, पुरुषों के लिए हितकारी है। यह…

  • Jalodarari Ras

    Post Views: 19 जलोदरारि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक, शुद्ध मैनशिल, हल्दी, शुद्ध जमालगोटा, हरें, बहेड़ा, आँवला, सोंठ, पीपल, काली मिर्च, चीते की छाल इनका चूर्ण प्रत्येक का 2-2 तोला लेवें, प्रथम पारद-गन्धक की कज्जली बना मैनशिल मिला कर रख लें, फिर…

  • Satavariadi Churan

    Post Views: 197 शतावर्यादि चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— यह चूर्ण पौष्टिक, श्रेष्ठ बाजीकरण और उत्तम वीर्यवर्द्धक है। इस चुर्ण के सेवन से रस-रक्तादि सप्त धातुओं की क्रमशः वृद्धि हो जाती है। इसके सेवन काल में ब्रह्मचय स रहने से शरीर में बल और पौरुष शक्ति की वर्धि होती है ओर निर्दोष…

  • Gulkand

    Post Views: 182 गुलकन्द गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसका प्रयोग करने से दाह, पित्तदोष, जलन, आन्तरिक गरमी बढ़ना और कब्ज के विकार नष्ट होते हैं तथा मस्तिष्क को शान्ति पहुँचाता है। इसके सेवन से स्त्रियों के गर्भाशय की गरमी शमित होकर अत्यार्तव (मासिक धर्म में अधिक रक्त जाना) रोग नष्ट होता है।…

  • Kamdhenu Ras

    Post Views: 34 कामधेनु रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध गन्धक और आँवला-कली चूर्ण इन दोनों को समान भाग लेकर आँवला-रस और सेमल मूसली के रस की 7-7 भावना देकर छाया में सुखा कर रख लें। — भै. र. मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)–  2-4 रत्ती, सुबह-शाम धारोष्ण…

  • Ushirasava

    Post Views: 377 उशीरासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से नाक, कान, आँखें, मल-मूत्र दवार से होने वाला रक्तस्राव, खूनी बवासीर, स्वप्नदोष, पेशाब में धातु जाना, मूत्रकृच्छ, मूत्राघात, उष्णवात , प्रमेह, बहुमूतर, स्त्रियों के रोग, श्वेत और रक्तप्रदर, ऋतुकाल या प्रसव के बाद में अत्यन्त रक्तस्राव, गर्भाशय-दोष, पेट का दर्द, रजःकृच्छूता,…