Similar Posts

  • Pitantak Ras

    Post Views: 15 पित्तान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  जावित्री, जायफल, जटामांसी, तालीशपत्र, श्वेत चन्दन, स्वर्णमाक्षिक भस्म, प्रवाल भस्म या पिष्ठी, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, कपूर–प्रत्येक 1-1भाग, रौप्य भस्म सब द्रव्यों के बराबर लेकर प्रथम चूर्ण कराने योग्य द्रव्यों का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण करें। पश्चात्‌ चूर्ण और समस्त…

  • HardIye Churan

    Post Views: 344 हृद्य चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits ) – हृदय की दुर्बलता (धड़कन), नाड़ी वेगाधिक्य–इन लक्षणों में इस चूर्ण का प्रयोग करें। हृदय रोग मे उपद्रव रूप मे जब सर्वांग शोथ हो तब आरोग्य वद्धनी के साथ मिलाकर इसका उपयोग करने से विशेष लाभ होता हैं। पुरानी खाँसी मं जब कफ…

  • Abhyadi Modak

    Post Views: 189 अभयोदि मोदक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से बद्धकोष्ठता (कब्जियत), मन्दाग्नि, विषम-ज्वर, उदररोग, पाण्डु और वात रोग आदि रोग नष्ट होते हैं। इसमें दन्ती और निशोथ ये दोनों विरेचक औषधियाँ हैं। और इनमें भी निशोथ की मात्रा ज्यादा है। निशोथ विरेचन के लिए प्रसिद्ध दवा है। यही कारण है…

  • Dhaniyepanchakarist

    Post Views: 173 धान्यपंचकारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह अरिष्ट उत्कृष्ट दीपन, पाचन और ग्राही है। इसका प्रयोग करने से अतिसार, प्रवाहिका और संग्रहणी रोग नष्ट होते हैं। अर्क सौंफ 5 तोला मिला कर पिलाने से यह पित्तातिसार और रक्तातिसार में अच्छा लाभ करता है। वक्तव्य : यह धान्यपंचक क्वाथ का योग है।…

  • Amritarnav Loh

    Post Views: 403 अमृतार्णव लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह रक्तशोधक, दीपक, पाचक और शक्ति-वर्धक है। इसके सेवन से सब प्रकार के कोढ़, वात-रक्त, अर्श (बवासीर) और उदर रोगों का नाश होता है। प्रकुपित वात जब रक्त दूषित कर देता है, तब शरीर में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।…

  • Gandhak Rasayan

    Post Views: 64 गन्धक रसायन मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  गाय के दूध से 3 बार शुद्ध किया हुआ गन्धक 64 तोला लें। उसको पत्थर के खरल में डाल, दालंचीनी, तेजपात, छोटी इलायची और नागकेशर-इन प्रत्येक का कपड़छन चूर्ण समान भाग में लेकर, इस चूर्ण को रात में द्विगुणित…