Rasmanikye
रसमाणिक्य
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध वंशपत्री (तवकी) हरताल को चूर्ण कर श्वेत अभ्रक-पत्रों पर बिछाकर उस पर दूसरे श्वेत अभ्रक पत्रों को रख कर बेर के पत्तों के कल्क से या मुलतानी मिट्टी और कपड़े से उसकी सन्धि बन्द कर दें, पश्चात् जब तक अभ्रक पत्रों का रंग गहरे लाल वर्ण का न हो जाए, तब तक बेर के कोयलों की तीव्र अग्नि पर पकायें, फिर नीचे उतार कर स्वांग-शीतल होने पर उसमें से माणिक्य के टुकड़ों के सदृश रस को निकाल कर सुरक्षित रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– आधी से 1 रत्ती तक विषम भाग शहद और गो-घृत या मक्खन-मिश्री के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- इस रस का प्रयोग करने से समस्त प्रकार के कुष्ठ रोग, वातरक्त, विसर्प, विपादिका (बिवाई), विचर्चिका तथा
- अनेक प्रकार के त्वचा रोग, भगन्दर, नाड़ी व्रण (नासूर), नासा रोग, मुख रोग, विस्फोटक आदि रोग नष्ट होते हैं।
- इसके अतिरिक्त उपदंश, दुष्ट व्रण, कास, श्वास, हृदयावरोध, वातश्लेष्मज्वर, विषमज्वर, सन्निपात ज्वर, विशेष पुण्डरीक कुष्ठ, चर्मदल कुष्ठ और मण्डल कुष्ठ, गलित कुष्ठ तथा आमवात रोग नष्ट करता है।
- यह श्वेत कुष्ठ में भी उत्कृष्ट लाभ करता है।
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