Nagarjunabhar Ras
नागार्जुनाभ्र रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – सहस्रपुटी वज्राभ्रक भस्म 7 दिन अर्जुन की छाल के रस में घोंट कर 1-1 रत्ती:की गोलियाँ बना, छाया में सुखा कर रख लें।
वक्तव्य: प्रायः लोग साधारण अभ्रक भस्म को ही 7 दिन अर्जुन छाल स्वरस की भावना देकर बनाते हैं। यह उपरोक्त से कुछ न्यून गुण होते हुए भी उत्तम लाभ करता है।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1-1 गोली सुबह-शाम मधु के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- इसके सेवन से हृदय-रोग, सब प्रकार के शूल, अर्श, हल्लास, छर्दि, अरुचि, अतिसार, अग्निमाच्च, रक्त-पित्त, क्षत, क्षय, शोथ, उदररोग, अम्लपित्त, पाण्डु, कामला और विषम ज्वरादि रोग नष्ट होते हैं।
- यह श्रेष्ठ रसायन भी है, अतः वीर्यवर्द्धक है।
- यह रसायन सहस्रपुटी अभ्रक भस्म में अर्जुन की छाल के क्वाथ की अनेकः भावनाएँ देकर बनाया जाता है। ये दोनों ही द्रव्य हृदय की शक्ति बढ़ाने में सर्वोत्तम हैं। अतएव यह हृदय रोगों के लिये बड़ी अच्छी दवा है।
- इससे हृदय की कमजोरी, धड़कन, हृदय में दर्द होना आदि हद्रोग अच्छे हो जाते हैं।
- हृदय की अनियमित गति को नियमित करने के लिए इसका सेवन बहुत लाभदायक है।
- मन्दाग्नि, पाण्डु, कामला, सूजन, अम्लपित्त, रक्तपित्त और विषम ज्वर आदि रोगों में भी यह औषध अच्छा काम करती है।
- बल, वीर्य, कान्ति और शक्ति बढ़ने में भी इसका उपयोग किया जाता है।
- स्नायुदौर्बल्य तथा मस्तिष्क की कमजोरी दूर करने में भी इसके सेवन से बहुत उत्तम लाभ होता है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
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