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    Post Views: 157 एरण्ड पाक गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से लकवा, पंगुवात, आमवात, ऊरुस्तम्भ, शिरागत वायु, कटिवात, बस्तिवात, कोष्ठगतवात, वृषणवृद्धि, सूजन, उदरशूल, अपेण्डिसाइटिस आदि रोग नष्ट होते हैं। यह पाक सारक और वातनाशक दवाओं में अपना प्रधान स्थान रखता है। कमजोर मनुष्यों की शक्ति बढ़ाने के लिये इसकां सेवन करना…

  • Sarvangsundar Ras ( Yakshma )

    Post Views: 7 सर्वांगसुन्दर रस ( यक्ष्मा ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक 1-1 तोला, सुहागे की खील 2 तोला, मोतीपिष्टी, प्रवाल भस्म, शंख भस्म-प्रत्येक 1-1 तोला, सुवर्ण भस्म 6 माशे लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना, उसमें अन्य दवा मिला, नींबू के रस में…

  • Swaskuthar Ras

    Post Views: 9 श्वासकुठार रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, सुहागे की खील, शुद्ध मैनशिल–प्रत्येक 1-1 तोला, कालीमिर्च 8 तोला, तथा सोंठ, मिर्च और पीपल 2-2 तोला लें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना लें, फिर उसमें अन्य औषधियों का कपड़छन किया हुआ चूर्ण…

  • Swaskas Chintamani Ras

    Post Views: 9 श्वास-कास चिन्तामणि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, लौहभस्म 4 तोला, अभ्रक भस्म 2 तोला, स्वर्णमाक्षिक भस्म 1 तोला, मोतीभस्म 3 माशे, सुवर्ण भस्म 1 तोला, इन सबको एकत्र खरल कर, कटेरी के रस, अदरक के रस और…

  • Vatgajankush Ras

    Post Views: 40 वातगजांकुश रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पारद भस्म (रससिन्दूर), लौह भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, शुद्ध गन्धक, शुद्ध हरताल, हर्रे, ककड़ासिंगी, शुद्ध बच्छनाग, सोंठ, मिर्च, पीपल, अरनी की जड़ की छाल, सुहागा प्रत्येक समान भाग लें। प्रथम पारा-गन्धक को कज्जली बना लें, फिर उसमें काष्ठौषधियों का कपड़छन…

  • Dhaniyepanchakarist

    Post Views: 173 धान्यपंचकारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह अरिष्ट उत्कृष्ट दीपन, पाचन और ग्राही है। इसका प्रयोग करने से अतिसार, प्रवाहिका और संग्रहणी रोग नष्ट होते हैं। अर्क सौंफ 5 तोला मिला कर पिलाने से यह पित्तातिसार और रक्तातिसार में अच्छा लाभ करता है। वक्तव्य : यह धान्यपंचक क्वाथ का योग है।…