Similar Posts

  • Vatgajankush Ras

    Post Views: 40 वातगजांकुश रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पारद भस्म (रससिन्दूर), लौह भस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, शुद्ध गन्धक, शुद्ध हरताल, हर्रे, ककड़ासिंगी, शुद्ध बच्छनाग, सोंठ, मिर्च, पीपल, अरनी की जड़ की छाल, सुहागा प्रत्येक समान भाग लें। प्रथम पारा-गन्धक को कज्जली बना लें, फिर उसमें काष्ठौषधियों का कपड़छन…

  • Hinguadi Churan

    Post Views: 319 हिंग्वादि चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits ) – इसके सेवन से पार्श्‍वशूल, हृदयशूल,बस्तिशूल, वात-कफज गुल्म, अफरा, ग्रहणी, अरुचि,छाती की धड़कन,श्वास, कास और स्वरभंग अर्थात‌ आवाज बैठ जाना आदि रोग दूर हाते हँ। यह दीपक, पाचक एवं रोचक हे तथा उत्तम वातशामक और शूलघ्न है यह चूर्ण वात-दोष की विकृति से…

  • Jatiyadi Tel

    Post Views: 239 जात्यादि तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस तैल के सब गुण लगभग जात्यादि घृत के समान ही हैं। इसके लगाने से विषाक्त घाव, जैसे-मकड़ी आदि विषैले जन्तुओं के स्पर्श से होने वाले घाव और समधारण घाव, चेचक, खुजली सूखी-गीली दोनों तरह की, विसर्प, शस्रादि से कट जाने पर हुआ…

  • Talkeshwar Ras

    Post Views: 26 तालकेश्वर रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध हरताल, सोनामक्खी भस्म, शुद्ध मैनशिल, शुद्ध पारा, सेन्धा नमक और शुद्ध सुहागा 1-1 तोला तथा शुद्ध गंधक और शंख भस्म प्रत्येक 2-2 तोला लेकर, प्रथम पारा गन्धक की कज्जली बना, पश्चात्‌ उसमें भस्मों तथा अन्य औषधियों का चूर्ण…

  • Haritiki Khand

    Post Views: 235 हरीतकी खण्ड गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से समस्त प्रकार के शूल रोग नष्ट होते हैं, विशेषतया अम्लपित्तजन्य शूल और अम्लपित्त को शीघ्र नष्ट करता है। इसके अतिरिक्त अर्श, कोष्ठगत वात विकार, वातरोग, कटिशूल और कठिन आनाह रोग को नष्ट करता है। यह उत्तम विरेचक भी है। मात्रा…

  • Brahma Rasayanam

    Post Views: 291 ब्राह्म रसायन गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेक्न से शरीर की दुर्बलता और दिमाग की कमजोरी दूर होकर आयु, बल, कान्ति तथा स्मरण-शक्ति की वृद्धि होती है। इसके नियमित सेवन से खाँसी, दमा, क्षय, कब्जियत आदि दूर हो, शरीर में स्थायी ताकत पैदा होती है। यह उत्तम रसायन होने…