Kamlahar Ras
कामलाहर रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध पारा 4 तोला, शुद्ध गन्धक 4 तोला, त्रिफला चूर्ण 16 तोला, यवक्षार 8 तोला, शुद्ध सज्जीखार 8 तोला, नौसादर सत्त्व 8 तोला लेवें प्रथम पारद-गन्धक की कञ्जली बना, उनमें अन्य दवा मिला, 3 घण्टे तक मर्दन करके शीशी में भर कर रख लें। –सि. यो. सं.
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1- 1 माशा दिन में 3 बार मक्खन निकाली हुई छाछ के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :-
- इस रसायन का उपयोग करने से समस्त प्रकार के पाण्डु रोग, कामला, कुम्भकामला और हलीमक आदि रोग नष्ट होते हैं।
- विशेषतया कामला रोग में इस रस के प्रयोग से सत्वर लाभ होता है।
- इसके अतिरिक्त शोथ रोग, मूत्रकृच्छ एवं समस्त प्रकार के रक्त -विकारों को नेष्ट करता है।
- इस रसायन के सेवन काल में मक्खन निकाली हुई छाछ और भात के पथ्य पर रहना रोगी के लिए विशेष लाभकारी है।
- गन्ना, मौसम्बी, संतरे का रस और नारियल का पानी पिलाना चाहिए।
- यह औषध साधारण मृदु रेचक भी है।
- इस औषध के सेवन काल में कब्ज की शिकायत रहे तो कुटकी चूर्ण या पञ्चसकार चूर्ण या मैगसल्फ देकर उदर की शुद्धि करा लेना चाहिए, मूत्रावरोध या मूत्र दाह होने की अवस्था में नारियल का पानी पिलाना विशेष लाभप्रद है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
Book Your Online Consultation