Similar Posts

  • Chanderkala Ras

    Post Views: 186 चन्द्रकला रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म 1 -1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, मोतीषिष्टी 2 तोला, कुटकी, गिलोय सत्त्व, पित्तपापड़ा, खस, छोटी पीपल, श्वेत चन्दन, अनन्तमूल, वंशलोचन-प्रत्येक का कपड़छन चूर्ण 1 – 1 तोला लेवें। प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली…

  • Chitrak Haritiki

    Post Views: 600 चित्रक हरीतकी गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- पुराने और बारम्बार होनेवाले प्रतिश्याय (जुखाम) में इसके सेवन से अच्छा लाभ होता है। खाँसी, पीनस, कृमि रोग, गुल्म, उदावर्त, अर्श, श्वास, मन्दाग्नि में भी यह श्रेष्ठ लाभ करती है। आचार्य यादवजी कहते हैं “इसके सेवन-काल में नाक में दिन में दो बार…

  • Bhringrajasava

    Post Views: 143 भूङ्गराजासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस आसव के उपयोग से सभी प्रकार के धातु-क्षय और राजयक्ष्मा रोग नष्ट होते हैं। पांचों प्रकार की खाँसी और कृशता को नष्ट करता है। यह बलकारक और कामोदरीपक है। इसके सेवन से बन्ध्यत्व दूर हो स्त्री सन्तानवती होती है। धातुक्षय के रोगी को इसका…

  • Punarnavadi Mandur

    Post Views: 306 पुनर्नवादि मण्डूर गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- मण्डूर और पुनर्नवा का यह रासायनिक योग शरीर में खून को बढ़ाता, सूजन को नष्ट करता तथा आँतों को बलवान बनाता है। यह समूचे शरीर की सूजन को नष्ट कर देता है। इसके प्रयोग से दस्त और पेशाब की क्रिया ठीक-ठीक होती है तथा…

  • Aawla Murabba

    Post Views: 432 आँवला-मुरब्बा गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह मुरब्बा अत्यन्त स्वादिष्ट और पित्तशामक है। इसके उपयोग से दाह, सिर-दर्द, पित्त कोप, चक्कर, नेत्र-जलन, बद्धकोष्ठ, अर्श, रक्तविकार, त्वचा दोष, प्रमेह और वीर्य के विकार नष्ट होते हैं। यह पित्तवृद्धि को शमन करता और शरीर को बलवान बनाता है। प्रवाल भस्म (चन्द्रपुटित) या…

  • Medohar Vidangadi Loh

    Post Views: 287 मेदोहर विडंगादि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस लौह का प्रयोग करने से समस्त प्रकार के मेदरोग नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त सब प्रकार के प्रमेह रोगों को नष्ट करता है और उत्तम बल्य तथा कान्ति, आयु और बल की वृद्धि करता है। जठराग्नि को प्रदीप्त करता है एवं…